हिन्द की शान

seemahari
मैं राष्ट्रभाषा मातृभाषा,
हिंदी हिंदुस्तान की शान।
बीते सात दशक आज़ादी
अब तक क्यों न मिली पहचान ?
दुनियाँ के सारे देशों को
है निज भाषा पर अभिमान।
सुनो पराई भाषा का तुम
मुझे त्याग करते क्यों गान।
उर्दू, आंग्ल, फ़ारसी सब को
आत्मसात कर
दिया है मान ।बीते….
मुझे राजभाषा कहते हो
पर-भाषा करती क्यों राज ?
मुझे बोल-लिखने में आती
बतलाओ क्यों तुमको लाज ?
निज-भाषा की अलख जगा,
तज आंग्ल दासता
बनों सुजान।
काम-काज सब अंग्रेजी में
कैसे पढ़ पायें अनजान ?
विद्यालय की खस्ता हालत
इंग्लिश माध्यम जगमग शान
मुट्ठी भर लोगों से होगा
क्या विकास
सोचो नादान ?
कंठ, ओष्ठ, मूर्धन्य, ताल,दंतीय सब अलग अलग हैं वर्ण
सारी दुनियाँ ने माने रस
गति,यति,लय,प्रिय मधुर कर्ण
जुड़ी न अब तक प्रान्तों से यह
कैसे हो पूरा उत्थान ?
बीते सात दशक आज़ादी
अब तक
क्यों न मिली पहचान ?
                 # सीमाहरि शर्मा
परिचय :
नाम-      श्रीमती सीमाहरि शर्मा
पति-     श्री हरिवल्लभ शर्मा ‘हरि’
शिक्षा-     एम.ए हिंदी साहित्य (लघु शोध प्रबंध..”सबहि नचावत राम गुसाईं”) एल.एल.बी
कार्यक्षेत्र- ग्रहणी
विधा-   गीत, ग़ज़ल, छन्द, कहानियाँ, आलेख आदि 
प्रकाशन-    साहित्य अमृत, सोच विचार, वीणा मासिक पत्रिका, गीत गागर, अनन्तिम, साहित्य सरोज, कर्मनिष्ठा, सत्य की मशाल आदि साहित्यिक पत्रिकाओं, ई-पत्रिकाएँ अनुभूति अभिव्यक्ति आदि एवम समाचार-पत्रों में गीत,गज़ल, कहानियों का प्रकाशन।
सांझा काव्यसंग्रह – “गीत प्रसंग”, “दोहा प्रसंग”, “अपूर्वा गीत-नवगीत संग्रह”, “काव्य-कुंज” ।
 
सम्मान- ओबीओ’साहित्यरत्न’सम्मान, सरस्वती प्रभा सम्मान, उदघोष साहित्य परिषद सम्मान, गीतिकालोक काव्य श्री सम्मान, अंतरा शब्दशक्ति सम्मान 2018, सत्य की मशाल द्वारा”साहित्य शिरोमणि”, निर्भया साहित्य कल्याण एवं शोध संस्थान भोपाल द्वारा “निर्भया साहित्य कल्याण सम्मान”आदि 
इंडिया न्यूज चैनल एवं दूरदर्शन मध्य प्रदेश पर काव्य पाठ
पता-  भोपाल(मध्यप्रदेश)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।