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जीवन दर्शन करवाती है....
Fri Jul 14 , 2017
अन्तःस्थल में उठती भाव रुपी लहरें, जब अनवरत हिलोरे खाती है। तब मानस पटल पर सहसा ही, कविता अंकित हो जाती है। हो जाए तो क्षण भर में ही, अन्यथा लम्बी यात्रा करवाती है। कभी कल्पना की उड़ान के साथ तो कभी निज अनुभवों को गाती है। कभी किसी दूसरे […]

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