असुरक्षा

kishor
मासूम बच्चियों के साथ बलात्कार और हत्या की घटनाओं ने,अपनी 10 वर्षीया बेटी के साथ अकेली जीवन यापन कर रही उस विधवा को हिलाकर रख दिया था। वह अपनी मासूम बच्ची के भविष्य को लेकर परेशान हो उठी थी।
उसने अपनी बेटी को सचेत करते हुए कहा-‘बेटी,अब से तुम स्कूल से लौटकर इधर-उधर खेलने-कूदने की बजाए सीधे पड़ोस की काकी के यहाँ चली जाया करना। वहीं खेलना-कूदना। कोई अपरिचित व्यक्ति तुम्हें लाख लालच दे,उसके साथ इधर-उधर कहीं भी मत जाना। मैं शाम को आॅफिस से घर लौटते समय तुम्हें वहीं से ले लिया करूंगी।’
कुछ दिन तक यह क्रम बहुत अच्छी तरह से चला तो माँ का मन भी उसकी चिंता छोड़कर धीरे-धीरे घर-दफ्तर के कामों में रमने लगा। एक दिन जब वह काकी के घर से अपनी बेटी को लेकर निकली तो,उसे वह उसे अत्यन्त गुमसुम और भयभीत-सी दिखलाई पड़ी। उसकी यह दशा देखकर माँ का माथा ठनका। जब उसने ज़ोर देकर उससे इसका कारण पूछा तो उसकी नन्हीं-सी बच्ची रोती-बिलखती उससे लिपट गई थी।
उसकेे मुंह से बस इतना ही निकल सका था- ‘… मां,आज काकी कहीं घर से बाहर गई हुई थीं और..घर में अकेले काका थे…।
                                                                            #किशोर श्रीवास्तव
परिचय : लेखनी की धार को समझने वाले किशोर श्रीवास्तव, केन्द्र सरकार के अधिकारी हैं।आप संपादक,कवि,गायक,कार्टूनिस्ट तथा कलाकर्मी के रुप में कार्यरत हैं। आर.के.पुरम,नई दिल्ली में आपका निवास है। 

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शहर

Fri Jul 7 , 2017
मेरा शहर न अब मेरा है, गली न मेरी रही गली है। अपनेपन की माटी गायब, चमकदार टाइल्स सजी है। श्वान-काक-गौ तकें,न रोटी मृत गौरैया प्यास लजी है। सेंव-जलेबी-दोने कहीं न, कुल्हड़-चुस्की-चाय नदारद। खुद को अफसर कहता नायब, छुटभैया तन करे अदावत। अपनेपन को दे तिलांजलि, राजनीति विष- बेल पली […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।