हिंदी के प्रचार प्रसार में सोशल मीडिया की भूमिका

sidheshwari
सदियों से हमारे भारत वर्ष में पत्रों का आदान प्रदान का महत्व रहा है। कई लडाई पत्र के सही समय पर नहीं मिल पाने के कारण हुई। बहुत सारी प्रेम गाथाएं कागज पत्रों पर लिखी गई। पहले राजा महाराजा के यहां बडे़ बड़े नगाड़ों से मुनादी पिटवाया जाता था। और सारे गाँव के लोग इकट्ठा हो कर उसे सुन कर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते थे। उनमें से स्वयं एक संदेश वाहक जो सबसे पहले सोशल मीडिया का काम किया, एक जगह से दुसरे जगह जाता और संदेश को दुसरे राजा के पास बताता था।
     धीरे धीरे कपड़े पर प्रत्र लेखन शुरू हुआ। फुलो के रंगों से स्याही बनाई जाती थी। कपड़े से फिर कागज पर हिन्दी भाषा या क्षेत्रीय भाषाओं पर प्रत्र डाक टिकट लगा कर एक जगह से दूसरे जगह जाने लगा। सोशल मीडिया में तार का चलन हुआ वहां सिर्फ अंग्रेजी भाषा का ही प्रयोग किया जाता था। क्योंकि बहुत कम शब्दों में ज्यादा लिखा होता था।
   धीरे धीरे समय सरकता गया और विज्ञान की उन्नति के कारण मोबाईल का अविष्कार 3अप्रेल 1973को हूआ। नित प्रगति से मोबाइल सशल मीडिया का प्रचार प्रसार का सबसे बड़ा साधन बन गया। हमारे बोलचाल की भाषा भी अब इंग्लिश और हिंदी मिला कर हिंग्लिश हो गयी। जिसे सब आसानी से समझने लगे। कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि अब सिर्फ मोबाइल पर ही दुनिया टिकी हुई है। मेरे दादाजी आजादी की लड़ाई में ज्यादा शरीक तो नहीं थे पर गांव पर रहकर जितना उनसे बनता था करते थे।वे कहा करते थे कि देखना एक दिन हमारा देश उंगली पर चलेगी तब उनकी बातें हमें समझ नहीं आती थी।
    मोबाइल के आ जाने से सब प्रकार से सुविधा हो गई। हिंदी भाषा लिखकर बच्चे देश-विदेश से अपने मम्मी पापा को संदेश भेज सकते हैं और गांव या शहर में रह रहे लोग भी हिंदी में लिख रहे हैं।
     ई-मेल, फेसबुक, ट्विटर, ब्लाग, स्नैप चैट और इंटरनेट सभी सोशल मीडिया में हिंदी के प्रचार प्रसार को बढ़ावा दे रहे हैं। आज इसके बिना हिंदी का बोल-चाल भी अधूरा रह गया है। कभी हम किसी अच्छे कवि, शायर की कविता, गजल को दूंढ नहीं पाते परंतु आज कोई लिख कर कही भी पोस्ट कर दे रहा है और वह सब जगह प्रचार हो जा रहा है
      आज सभी जगह हिंदी में काम होने लगा है। हिंदी में फार्म भरना बैंक का काम हिंदी मे और हमारे साहित्य कार अपनी सारी रचनाएं हिंदी में ही लिखते हैं। जिसे विदेश में अंग्रेजी में ट्रांसलेशन कर पढ़ा जाता है। जहां पर समझ नहीं आता वहां पर वो गुगल की मदद लेते हैं। हमारे भारत सरकार द्वारा हिंदी पखवाड़े का कार्यक्रम भी चलाया जाता है। जहां सभी अपनी बात सुविधा जनक हिंदी में रखते हैं।
    आज कोई भी कठिन शब्दों का ज्ञान हिंदी में उपलब्ध हो जाता है। आज सभी जगहों पर लिखा मिलता है कि आप हिन्दी में बात करेंगे तो मुझे प्रशन्नता होगी। जो अपने आप में प्रचार प्रसार की अभिव्यक्ति है। कई जगहों पर तो हिन्दी को प्रमुख भाषा के रूप में अपना लिया गया है। हिंदी एक सरल समझ में आने वाली भाषा के कारण सोशल मीडिया में इसका प्रयोग ज्यादा किया जाता है। अंग्रेजी में संस्मरण कठिन हो जाता है परंतु हिंदी में सब संभव हो जाता है। आज हमारे प्रधानमंत्री श्री मोदी जी हर सप्ताह अपने मन की बातें करते हैं और आग्रह भी करते हैं कि उन तक पहुंचने वाला प्रत्र हिंदी में लिखा हो। गर्व की बात है कि हमारे देश का राष्ट्रगान भी हिंदी को सुशोभित करते हैं। सर्व प्रथम हम सोकर उठते हैं या 80%घरों में ऊं से ही दिनचर्या शुरू होती है। वो भी हिंदी ही है। ऊं किसी अंग्रेजी या दूसरी भाषा का पर्याय नहीं है। ऊं का उच्चारण तो बम्हाड में भी होता है। ये हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिक सिद्ध कर चुके हैं। ये हैं सोशल मीडिया में हिंदी का प्रचार प्रसार। जन मानस को समझ में आ जाये सभी उसका लाभ ले सके। इसलिये अधिकांश किताबें अब हिंदी भाषा में ही प्रकाशित होने लगी है।
  #सिद्धेश्वरी सराफ (शीलू)
     जबलपुर मध्य प्रदेश

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।