प्यार जब इश्क बन जाता है

कहते हैं प्यार एक बला है
जमाना इस बला को
गले लगाता क्यों हैं ?
प्यार की एक नजर
कैसे छू जाती है नजर को
अजनबी- अनजाने से बावरे बन
क्यों जीने लगते हैं एक संग ?
प्यार जब इश्क बन जाता है
तब रुहें एक हो जाती है
एहसास एक हो जाते हैं
समां जाती है निगाहें
मन से अंतर्मन में
बंध जाता है एक अटूट बंधन
गूंथ जाता है नाम क्यों ?
इश्क का सांसो संग
दिए जाने लगती है उपमाएं
राधा-कृष्ण की
शब्द हो जाते हैं मौन
पर मौन संवाद अंतहीन हो जाते हैं
फिर लोग कहने लगते हैं कि
इश्क महसूस करना
किसी इबादत से कम नहीं
जरा बताइए छूकर खुदा को किसने देखा है।

स्मिता जैन

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