एक गांव में एक किसान अपनी पत्नी और दो बेटों के साथ रहता था। खेती करके अपना जीवन यापन करता था ।वो बहुत गरीब था,बहुत मेहनत करने के बाद भी वो अपने परिवार का ढंग से पालन-पोषण नहीं कर पाता था। ज्यादा धन न कमा पाने की वजह से वो अपने बच्चों को विद्यालय भी नहीं भेज पाता था,लेकिन उसे और उसके परिवार को ईश्वर में बहुत भरोसा था। वे भगवान की रोज़ पूजा किया करते थे,और अपने दुख -दर्द उनसे कहते थे। किसान के बड़े बेटे जिसका नाम राम था,उसे विद्यालय जाकर पढ़ने का बहुत मन था। वह भी पढ़-लिखकर नौकरी करके अपने परिवार को ओरों की तरह खुश देखना चाहता था,लेकिन पिता की कम कमाई की वजह से ये संभव नहीं हो पा रहा था। इस कारण वह बहुत उदास रहने लगा था।
उसने कभी सुना था कि,भगवान अपने भक्तों की हर बात सुनते हैं,अतः वह भगवान की पूजा करने लगा,और भगवान को अपनी परेशानी बताने लगा। एक दिन उसने सोचा,भगवान के तो मेरे जैसे बहुत भक्त हैं,शायद वो मेरी पुकार सुन नहीं पा रहे हैं, इसलिए क्यों न अपनी बात लिखित में भेजूं,सो उसने भगवान को एक पत्र लिखा। उसने अपनी सारी परेशानी पत्र में लिखकर डाकघर में डाल दी। डाकघर के कर्मचारियों ने जब वो भगवान के नाम खुली चिठ्ठी पढ़ी तो,उसका बहुत मज़ाक बनाया। इधर बहुत दिन तक जब राम को भगवान की लौटती डाक नहीं मिली तो,वो बहुत उदास हो गया। उसका भरोसा भगवान से भी उठने लगा।अचानक एक दिन डाकिया उसके नाम का मनीआर्डर ले आया,जिसे देखकर वो बहुत आश्चर्यचकित हो गया और भगवान की सहायता समझकर बालक राम बहुत खुश हुआ। वह स्कूल में प्रवेश लेकर खूब मन लगाकर पढ़ाई करने लगा ,लेकिन उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि,ये भगवान हर माह उसकी फीस के पैसे कैसे भेज रहे हैं।
उस दिन डाकघर में कुछ कर्मचारियों ने इस बालक की भगवान के नाम की चिट्ठी का बहुत मज़ाक बनाया और कुछ ने इस की मदद करने की सोची। उस बालक के लिए अपने वेतन में से कुछ अंश जमा करके बालक तक पहुंचा दिया।
डाकघर के कर्मचारियों को भी इस बात से बहुत खुशी हुई कि,उनके द्वारा दी गई एक छोटी-सी सहायता से किसान के बेटे का भविष्य बन सका।
इस कहानी के माध्यम से हमें ये शिक्षा मिलती है कि, हमें अपने जीवन मे किसी जरूरतमंद की सहायता का अवसर मिले तो,अवश्य करना चाहिए ।
#अलीशा सक्सेना
Very good story and a very good and thoughtful meaning. A very good message
We should all help others and this makes us realise our responsibility