अहद प्रकाश जी की स्मृति पर मातृभाषा ने घोषित किए दो पुरस्कार

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इंदौर। प्रसिद्ध बाल साहित्यकार एवं ग़ज़लकार अहद प्रकाश जी की स्मृति में मातृभाषा उन्नयन संस्थान ने दो सम्मान, ‘अहद प्रकाश बाल साहित्य गौरव सम्मान’ एवं ‘अहद प्रकाश ग़ज़ल रत्न सम्मान’, घोषित किए, जो प्रतिवर्ष एक बाल साहित्यकार एवं एक ग़ज़लकार को दिए जाएँगे। इन पुरस्कारों के लिए देशभर से प्रविष्टियाँ आमंत्रित की जाएँगी एवं चयन मण्डल द्वारा सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति का चयन कर, उन्हें समारोह में सम्मानित किया जाएगा।

बीते दिसम्बर माह में मातृभाषा उन्नयन संस्थान के संरक्षक अहद प्रकाश जी का निधन हो गया था, और आज उनकी जन्मजयंती है तो उनकी स्मृति को चिर स्थायी बनाने के उद्देश्य से संस्थान द्वारा इन पुरस्कारों की घोषणा की गई है। प्रतिवर्ष जून एवं दिसम्बर माह में क्रमश: ‘अहद प्रकाश बाल साहित्य गौरव सम्मान’ एवं ‘अहद प्रकाश ग़ज़ल रत्न सम्मान’ प्रदान किए जाएँगे।

संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने बताया कि ‘अहद जी हिन्दी-उर्दू साहित्य के सर्व स्वीकार्य व्यक्तिव थे, धर्मवीर भारती जैसे सैंकड़ो संपादकों ने उनके सृजन को प्रकाशित किया है, उनका व्यक्तित्व एवं कृतित्व प्रेरणादायी है। उनकी स्मृतियों को चिर स्थायी बनाने के उद्देश्य से अहद प्रकाश जी के परिवार से उनकी धर्मपत्नी, दोनों बेटियाँ फ़ला एवं फ़रहा सहित उनके सुपुत्र ओसाब की सहमति से दोनों सम्मान प्रदान किए जाएँगे।’ डॉ. अर्पण जैन ने यह भी बताया कि ‘अहद जी के सृजन को शोध, अध्ययन इत्यादि एवं जनमानस के पठन-पाठन के लिए सहज उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से संस्थान एक पुस्तकालय भी बनाएगा।’
इस वर्ष दोनों पुरस्कार दिसम्बर में प्रदान किये जाएँगे किन्तु आगामी वर्षों में एक पुरस्कार जून और दूसरा दिसम्बर में दिया जाएगा।
संस्थान के संरक्षक डॉ. वेदप्रताप वैदिक, राजकुमार कुम्भज सहित संस्थान की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. नीना जोशी, राष्ट्रीय सचिव गणतंत्र ओजस्वी, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष शिखा जैन, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य भावना शर्मा, नितेश गुप्ता, सपन जैन काकड़ीवाला सहित अहद प्रकाश जी के मित्र रामेश्वर टेलर, सरवत जैदी आदि ने हर्ष व्यक्त किया।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।