अधजगी रात

0 0
Read Time38 Second

swpnil
पलकों के पट भिड़ जाने से,
निंदिया नहीं आया करती है।
ख्वाबों में प्रियतम आए फिर,
बिंदिया शरमाया करती है।।

रात-रात इक द्वन्द है चलता,
चद्दर,तकिया सब रूठे रहते।
रुक-रुक नयनों से वर्षा होती,
कुछ सपने बिखरे टूटे रहते।।

कभी खजुराहो मूरत सजती,
कभी प्रेमालाप चलता रहता है।
कभी-कभी गजरे की खुशबू,
तन-मन सब महका रहता है।।

कभी खनकती उनकी कंगन,
कभी छनकती है पायल भी।
कभी कान का झुमका झूमे,
नाचे फिर ये मन घायल भी।।

           #स्वप्निल

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

'वन्दे मातरम्' यहां का गौरव

Sat Apr 22 , 2017
तुम तो समझते हमको दुश्मन,हम तो समझें तुमको मीत। तुम तो पालते हमसे नफरत,हम तो रखते तुमसे प्रीत।। क्यों नहीं गा सकते हो इसको,किसका है ये गीत। न तेरा है न मेरा है,ये राष्ट्र का है गीत।। वन्दे मातरम् यहां का गौरव,फैलाते हम विश्व शान्ति। लगता तुझको घर्म विरोधी,ये है […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।