दिल के हालात  

Read Time0Seconds
sanjay
कभी कभी हम दिल के, हालात भी लिखते हैं…,
दिल पर जो गुजरती है, वो ही व्या करते है /
हर वक़्त वाह वाह की, ख्वाहिश नहीं होती…,
हँसाने के चक्कर में, कभी कभी खुद रोते है //
छोटी सी ज़िंदगी है, इसलिए हर बात में खुश रहो ,
जो चेहरा पास ना हो, उसकी आवाज में खुश रहो /
कोई रुठा हो आपसे, उसके अंदाज़ में खुश रहो ,
जो लौट के नहीं आने वाले, उनकी याद में खुश रहो //
कल किसने देखा है, अपने आज में खुश रहो ,
इसके लिए खुद जीओ, औरो को भी जीनो दो /
तभी तो जिंदगी जिन्दा, दिली से जी पाओगे ,
खुद के दर्द भूलकर, औरो के गम अपनाओगे //
घुटघुट कर जीने से बेहतर है, हंसकर जीओ जिंदगी ,
मरना जीना तो लगा, रहेगा इस संसार में /
क्या तो लेकर आये थे, और क्या लेकर जायेंगे  ,
जो कुछ भी कमाया, सब यही छोड़ जायेंगे//
जन्म मरण के इस चक्र को ,हम सब यही दोहराएँगे //

#संजय जैन

परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब 24 वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं।ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों  पर भी दिखा चुके हैं। इसी प्रतिभा से  कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें  सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखते हैं। मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की  शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है,जबकि लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

शशांक मिश्र भारती को राष्ट्रीय कवि चौपाल एवं ई पत्रिका स्टार हिन्दी ब्लाग ने सम्मानित किया

Mon Feb 18 , 2019
देश में शहीदों की नगरी के नाम से विख्यात उत्तर प्रदेश शाहजहांपुर के शशांक मिश्र भारती को 05फरवरी के अपने आयोजन में राष्ट्रीय कवि चौपाल एवं ई पत्रिका स्टार हिन्दी ब्लाग ने स्टार हिंदी साहित्यकार सम्मान 2019 से सम्मानित किया है।यह सम्मान अध्यक्ष कासिम बीकानेरी प्रचारक कृष्ण कुमार सैनी राज […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।