लोकतंत्र के नाम पर

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लोकतंत्र के नाम पर
पूंजीवाद के मकड़जाल में फंसता आदमी ।
असुरक्षित सत्ता से
सुरक्षा की गुहार लगाता आम आदमी ।
भावनाहीन, तर्कहीन चाटुकार प्रशासन से
अपनी सुविधाओं की भीख मांगता आदमी ।
राष्ट्रवाद के नाम पर अपने ही सैनिकों के खून पर
फिर से सत्ता सुंदरी को पाते हैं हमारे जनप्रतिनिधि ।
टैक्स पर टैक्स देते महंगाई की मार सहकर
मुंह पर मास्क लगाकर कठपुतली सा बनता आदमी ।
श्री जी के पाखंडी अनुयायियों को
परिश्रम से अर्जित मुद्रा कोसमर्पित कर
अपनी बहन बेटियों की इज्ज़त को
लुटता हुआ देखता आदमी ।
अपनी बेखौफ निडर आवाज को बड़े- बड़े मीडिया हाउस की संस्कृति में अपनी जमीर को बेचता नारद मुनि ।
नित प्रतिदिन अपनों की लाशों पर विलाप करता
चिकित्सक रूपी कलयुगी भगवानों से
लुटता/मरता बीमार आदमी ।
पेट काटकर अपने बच्चों की पढ़ाई पर मोटी रकम देकर
अपनी दरिद्रता को खत्म करने के नाम पर
डिग्री रूपी कागज़ का टुकड़ा लेकर
नौकरी की तलाश में लुटता युवा भारतीय।

स्मिता जैन

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।