टोटल हेल्थ कार्यक्रम जनता की भाषा में क्यों नहीं ?

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महोदय,
आपका टोटल हेल्थ कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्र के लोग नहीं देख रहे हैं जबकि इस कार्यक्रम की आवश्यकता ग्रामीण क्षेत्र में सबसे अधिक है। कार्यक्रम न देखने का एक कारण यह है कि आपके जो प्रस्तोता, विशेषज्ञ एवं डॉक्टर हैं वे यह कार्यक्रम हिंग्लिश यानी कि अंग्रेजी और हिंदी की मिश्रित भाषा में करते हैं या फिर अंग्रेजी में करते हैं, हिन्दी बहुत कम सुनाई देती है ।

यह भाषा ग्रामीण क्षेत्र के लोग नहीं समझते हैं, हमारे यहां बोलचाल में अभी भी हिंदी ही बोली जाती है। बड़े-बड़े शहरों में लोग हिंग्लिश बोलते होंगे पर छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में आज भी हिंग्लिश नहीं चलती है इसलिए हमें आप का कार्यक्रम समझ में नहीं आता है। वैसे भी दूरदर्शन को बड़े शहरों में देखने वालों की संख्या काफी कम है और गाँवों में अधिक इसलिए आपसे अनुरोध है अपने कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्र और छोटे कस्बों को ध्यान में रखकर बनाएं, इसका कार्यक्रम को हिन्दी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में अलग-अलग कर दीजिए, हिंदी का कार्यक्रम शुरू करने से बड़ी सुविधा होगी।
आशा है आप हमारी असुविधा, परेशानी व कष्ट को समझेंगे।

धन्यवाद सहित

भवदीय
अभिषेक कुमार

वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुंबई

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।