देश मांगे `सर्जिकल स्ट्राइक-२`

 

sunil patel

सुकमा में नक्सली हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के २५ जवानों की शहादत का दर्द देश अभी तक भूला ही नहीं था कि,एक तरफ पाकिस्तानी सेना ने सीमा पर `सीजफायर` का उल्लंघन किया और हमारे २  जाबांज जवान शहीद हो गए,वहीं कश्मीर में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन द्वारा किए गए आतंकी हमले में ५ पुलिस जवान और २ बैंक गॉर्ड शहीद हो गए हैं। कुल मिलाकर पाक अपनी कायराना हरक़त से बाज नहीं आ रहा है,और उसकी सेना ने हमारे सैनिकों के शवों के साथ घृणित हरक़त की,जिसका माकूल जवाब तो हिन्दुस्तानी सेना ने पाक की २ पोस्ट तबाह करके दिया,मगर कब तक इस तरह हम बाहर से पाक और उसी द्वारा प्रायोजित आतंकियों से और अंदर इन नक्सलियों के हाथों हमारे जवानों को शहीद होते हुए देखेंगे और हाथ-पर-हाथ रखे बैठेंगे? इस तरह की हरकतों को अंजाम देकर पाक तो काफी हद तक खुश होगा,मगर शहीदों की शहादत पर पूरा देश आक्रोशित है और शहीदों के परिजनों की भी मांग है कि उन्हें सिर के बदले सिर चाहिए।

राजनीतिक और कूटनीतिज्ञ तरीके से इस तरीके की घटनाओं को रोकने के भारत के शांतिपूर्ण प्रयासों को हर बार ताक पर रखकर पाकिस्तान इस तरह की कायराना हरकत करता है,जिसका अब कड़े तौर पर जवाब देने का वक़्त आ गया है। एक छोटा-सा देश जो अपनी सेना को लगभग पूरी छूट देता है,मगर हमारी सेना कहीं-न-कहीं हर बार आलाकमान के फैसलों को मानने को मजबूर होती है,जिसका पाकिस्तानी सेना,आतंकवादी और नक्सलवादी फायदा उठाते हैंl हिन्दुस्तानी सेना सक्षम है,और इस तरह के हमलों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए आतुर भी,बस अब प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री एक बार फिर `सर्जिकल स्ट्राइक` के आदेश दें,ताकि भारतीय सेना दुश्मनों को दिखा दे कि,वो अपनी तरफ उठने वाली नापाक नज़रों को नोंचने का माद्दा रखती है,जिस पर देश को गर्व है। जवानों की शहादत पर पूरे देश को गर्व है,मगर भारत के सपूतों की जान उनके परिजनों के लिए ही नहीं,वरन देश के लिए बड़ी क्षति हैl  इसकी भरपाई तो संभव नहीं,मगर दुश्मनों से बदला लेकर उनकी पीड़ा को कम जरूर किया जा सकता है। अब तो सबकी यही मांग है कि,बस अब जाबांज हिन्दुस्तानी सैनिकों की दहाड़ से बुज़दिल पाकिस्तान थर-थर काँपने को मजबूर हो जाए और हमारे जवान फिर उसी के घर में घुसकर उसे मारें,ताकि हमारे शहीदों की शहादत व्यर्थ न जाएl

                                                              #सुनील रमेशचंद्र पटेल
परिचय : सुनील रमेशचंद्र पटेल  इंदौर(मध्यप्रदेश ) में बंगाली कॉलोनी में रहते हैंl आपको  काव्य विधा से बहुत लगाव हैl उम्र 23 वर्ष है और वर्तमान में पत्रकारिता पढ़ रहे हैंl 

 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।