तुम्हारे गीत मेरी आवाज़

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कभी गमो का साया भी
नहीं पड़े तुम पर।
खुशी की गीत गाओ
उदासियों की महफ़िल में।
बहुत सुकून मिलेगा
मायूसो के चेहरे पर।
महफ़िल में रोनक आ जायेगी
तुम्हारे गीतों को सुनकर।।

मिले गमो का साया भी,
उसको भी गीत बना लेंगे।
तेरी जुल्फों की साया में
हम सारी रात बिता देंगे।
क्योंकि सुनकर तुम्हारे गीत
मै मोहित हो गया हूँ।
भूल गया सारे गमो को
और दिवाना हो गया हूँ।
दिलकी धड़कनो में अब
तुम ही तुम धड़क रही हो।।

अब मुझे न नींद आ रही
न ही मन मेरा लग रहा है।
अब तेरी याद सता रही है
और बेचैनी बड़ा रही है।
मुझे अपना मीत बना लो
होठों से मेरे गीत सजा लो।
तुम्हारी बेचैनी मिट जायेगी
जब दिलमें शमा जाओगी।।

अब तुम्हें देखकर लिखता हूँ।
और बस तुम्हें ही गाता हूँ।
आवाज़ मेरी होती है
पर दिलसे तुम गवाते हो।
और मेरी वाह-2 करवाते हो।।

जय जिनेंद्र देव
संजय जैन (मुंबई)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।