पानी का महत्व

mukesh rishi varma

पानी सफेद सोना है और यह सोना इस समय भारत के अधिकांशत: गांवों में सडकों और नालियों में बुरी तरह से बहाया अथवा फैलाया जा रहा है | इसी सफेद सोने की बूंद – बूंद के लिए भारत के कुछ हिस्सों में प्राणी तरस रहे हैं | लेकिन जहाँ यह अभी भी उपलब्ध है, वहाँ लोग इसे बचाने की तरफ कोई खास ध्यान ही नहीं दे रहे हैं | उन्हें भी जल्द पता चलने वाला है कि एक बूंद कितनी कीमती है | जबसे गांवों में समरसेबिल बोरिंग पम्प (इलैक्ट्रॉनिक) लगना शुरु हुई हैं तबसे लोग पानी को बहुत बुरी तरह से बर्बाद करने लगे हैं | एक आदमी नहाने में ही सैकड़ों लीटर पानी सड़कों पर, नालियों में बहा देता है वो भी पूर्णतः स्वच्छ मिनरल वाटर | शहरों में जिसकी कीमत बहुत अधिक होती है और शायद ही ऐसा पानी मिलता हो |

भारत में बढती जनसंख्या के साथ संसाधनों की जरूरत भी बढ रही है | लेकिन कुछ प्राकृतिक संसाधनों को हम अपनी मर्जी से बढा भी नहीं सकते | कुछ पदार्थों के  बगैर जिआ जा सकता है परन्तु पानी के बगैर कोई भी प्राणी जीवित नहीं रह सकता | आपकी जानकारी के लिए यहां यह बताना बेहद जरूरी है कि पहले हमें जल सम्पन्न देशों की श्रेणी में गिना जाता था, लेकिन अब हम जल सम्पन्न देशों की श्रेणी से बाहर हो चुके हैं | और यह कितना भयावह है कि इसका अंदाजा हम अभी नहीं लगा पा रहे हैं | लेकिन इस हकीकत से हम ज्यादा देर तक आँख मिचौली का खेल नहीं खेल सकते हैं, जल्द हम सबको पानी की एक-एक बूंद की कीमत का पता चलने वाला है |

निरन्तर भूजलस्तर का गिरना, पानी की कमी का खुला संकेत है पर हमारे पास तो बेहतर से बेहतर मशीनें हैं जो कितना भी गहरा पानी हो उसकी बूंद-बूंद खींच लें, परन्तु आज तक ऐसी कोई मशीन नहीं बनी जो पानी बना सके |
भले ही भारत में वर्षा और हिमपात के रूप में पर्याप्त पानी बरसता है, लेकिन यह पूरा का पूरा पानी सही इस्तेमाल के लिए उपलब्ध नहीं है | अधिकांश पानी देश की विशिष्ट भू आकृति व अज्ञानतावश इधर-उधर से बहकर समुन्द्र में चला जाता है | कुछ हिस्सा भाप बनकर उढ़ जाता है और थोड़ा बहुत बचता है, उसे ही धरती सोंख पाती है, इससे पर्याप्त रूप में पानी धरती के अन्दर नहीं पहुंच पाता और यही कारण है कि निरन्तर भूजलस्तर नीचे गिर रहा है | अपने देश में ही नहीं दुनियाभर में हालत इतनी नाजुक है कि अगर मौसम थोड़ी सी भी ऊंच-नीच कर देता है तो नतीजे भयानकरुप में निकल कर सामने आ जाते हैं |

अब वक्त की बहुत जरूरी मांग है कि लोगों को जागरुक हो जाना चाहिए | राजनेताओं से मुफ्त में मिली सम्बरसेबिल बोरिंग पम्पों का सही इस्तेमाल करें | पानी की जितनी जरुरत हो उतना ही खर्च करें | कोशिश करें कि कम से कम खर्च हो | जब बाल्टी से एक आदमी महज 10-12 लीटर पानी में नहा सकता है तो क्यों सिर पर पाइप लगाकर सैकड़ों लीटर पानी सडकों पर बहा रहे हो | गाडी धौने के गलत तरीके से हजारों लीटर पीने योग्य पानी को नालों में बहा रहे हो | बंद करो यह सब… वर्ना वो दिन दूर नहीं जब पानी की एक-एक बूंद के लिए तुम्हारा सारा सोना-चांदी, रुपया-पैसा कम पड़ जायेगा |

#मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

परिचय : मुकेश कुमार ऋषि वर्मा का जन्म-५ अगस्त १९९३ को हुआ हैl आपकी शिक्षा-एम.ए. हैl आपका निवास उत्तर प्रदेश के गाँव रिहावली (डाक तारौली गुर्जर-फतेहाबाद)में हैl प्रकाशन में `आजादी को खोना ना` और `संघर्ष पथ`(काव्य संग्रह) हैंl लेखन,अभिनय, पत्रकारिता तथा चित्रकारी में आपकी बहुत रूचि हैl आप सदस्य और पदाधिकारी के रूप में मीडिया सहित कई महासंघ और दल तथा साहित्य की स्थानीय अकादमी से भी जुड़े हुए हैं तो मुंबई में फिल्मस एण्ड टेलीविजन संस्थान में साझेदार भी हैंl ऐसे ही ऋषि वैदिक साहित्य पुस्तकालय का संचालन भी करते हैंl आपकी आजीविका का साधन कृषि और अन्य हैl

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।