भवतार पार उतारिए…

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niraj gair
जय मातु केहरिवाहिनी सब पर कृपा कर दीजिए,
हम आपके सब लाल हैं,भवतार पार उतारिए।

संसार की सारी चमक चमके तुम्हारे भाल से,
संहार दुष्टों का किया श्रंगार मुन्डों के माल से।

प्रतिमा तुम्हारी दिख रही नयना नयन अभिराम है,
चक्षु नेत्र शोभित आपका काजल जगत की शाम है।

तुम शक्ति की दात्री-विधात्री हम शरण में आपकी,
पूजा कराऊँ जागरण आरती उतारुं आपकी।

सब शोक मेरे दोष मेरे रोग बाधा दूर हो,
ममतामयी जग मातु जीवन प्रेम से भरपूर हो।

सुर देव नर गन्धर्व ऋषियों पर लुटाती प्यार हो,
हम सब सहारे आपके,तुम सबकी पालनहार हो।

नव दिन तुम्हारे रूप नौ प्रतिदिन तुम्हारी साधना,
फलीभूत होती दिख रही हर व्यक्ति की आराधना।

जो भक्ति विह्वल प्रेम से विश्वास से पूजा करे,
नीरज कहे दारुण अविद्या शोक माँ दुर्गा हरे।

माता अपने लाल का सदा करे कल्याण,
व्रत पूजा न कछु पता, जानूं नहीं विधान।

जैसे माँ की गोद में पलता शिशु अबोध,
मैं मूरख मतिमन्द को कर दो मातु सुबोध।।

                                                                            #नीरज त्रिपाठी गैर

परिचय : उ.प्र. के गोण्डा निवासी नीरज त्रिपाठी ‘गैर’ का काव्य जीवन छोटा है,पर इनके गुरु दिनेश त्रिपाठी ‘शम्स’ के मार्गदर्शन में अच्छी लेखनी जारी है। यह सौ से अधिक मुक्तक श्रृंखला, गीत,ग़ज़ल,कविता,मुक्त कविता और कहानियों को रच चुके हैं। कुछ रचनाएं पत्रिकाओं में छपी भी हैं। खास बात यह है कि,वायुसेना में रहकर मातृभूमि की सेवा कर रहे हैं।

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।