सत्य-पुंज

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shubha
रामायण में आदिकवि,करते हैं उल्लेख।
रामराज्य के रूप को,खुले नयन मन देख।।

ग्यारह हजार वर्ष तक,रहे अवध श्रीराम।
बन्धु-बान्धवों संग ही,बना लोक सुख-धाम।।

रावण रुपी छ्ल मरण,हरण दंभ सब पाप।
सत्य सुयश का मार्ग ही,दिखलाते प्रभु आप।।

सीता माता के हृदय,नाथों के हैं नाथ।
मर्यादा पालक प्रभो,रहे सर्वदा साथ ।।

अनुगामिनी अनघ सिया,अचल अजर श्रीराम।
त्रास मिटाने हेतु ही ,प्रकट हुए इस धाम।।

आगे की जो भी कथा,दीन सिया का हाल।
परित्याग वन-गमन सब,क्षेपक करें कमाल।।

अवधी भाषा में रची,पूज्य बनी संसार।
रामचरित मानस सभी, करते अंगीकार।।

किन्तु अछूता कब रहा,कोई रचनाकार।
समय झलकता सृजन में,कहे लेखनी- धार।।

पूज्य रहेगें सर्वदा, अजर अमर भगवान।
कण-कण-प्रतिक्षण व्याप्त हैं,रहे सभी को ध्यान।।

मंजुल मंगल मोदमय,अवध बिहारी रुप।
म्लान हृदय को दे रहे,सुख सब सुयश अनूप।।

राम राम श्री राम हे, जगत पिता हो आप।
सदा विराजो उर ‘अधर’,मेटो जग संताप।।

                                                                         #शुभा शुक्ला मिश्रा ‘अधर’

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।