वास्तु शास्त्र और फेंगशुई को लोग एक समान समझने की गलती कर रहे हैं। जिसके कारण लोग वास्तु शास्त्र की अपेक्षा फेंगशुई में बताई गई वस्तुओं का अधिक उपयोग करने लगे हैं। बाजारों में दुकाने फेंगशुई की सामान से भरी पड़ी है।और लोग बिना समझे उसका अत्यधिक उपयोग करते जा रहे हैं। समय है दोनों के बीच के अंतर को समझने का।
वास्तु शास्त्र कला, विज्ञान, खगोल विज्ञान और ज्योतिष का मिश्रण है। वास्तु विज्ञान जल, पृथ्वी, वायु, अग्नि और आकाश जैसे प्राकृतिक बलों के आधार पर कार्य करता है। इन पांचों तत्वों के बीच में होने वाली क्रिया को वास्तु के नाम से जाना जाता है। वास्तु शास्त्र विज्ञान और संस्कृत दोनों पर आधारित है। तथा अत्यधिक प्राचीन विज्ञान है।
फेगंशुई चीन की एक प्राचीन कला है। चीनी भाषा में फेगं का अर्थ ‘हवा’ और सुई का अर्थ ‘पानी’ है। फेंगशुई भूगोल पर आधारित है, तथा हवा और पानी के आधार पर कार्य करता है।
हम कह सकते हैं कि वास्तु शास्त्र विज्ञान पर आधारित है और फेंगशुई भूगोल पर। विज्ञान के नियम हर जगह सामान्य कार्य करते हैं पर भौगोलिक स्थिति हर स्थान की समान नहीं होती है। वास्तु शास्त्र फेंगशुई की अपेक्षा अत्यधिक प्राचीन शास्त्र है। फेंगशुई घर में सकारात्मक उर्जा को संतुलित करता है, और वास्तु शास्त्र के द्वारा आधुनिक वैज्ञानिक तरीके से जीवन में सभी क्षेत्रों में सुख समृद्धि और सफलता प्राप्त की जा सकती है। वास्तु शास्त्र को अपनाएं और अपनी संस्कृति को बढ़ावा दें।
नाम-प्रज्ञा पाण्डेय
साहित्यिक उपनाम-प्रज्ञा पाण्डेय
वर्तमान पता-उन्नाव, उत्तर प्रदेश
राज्य-उत्तर प्रदेश
शहर-उन्नाव
शिक्षा-डबल एम ए (अंग्रेजी साहित्य व इतिहास)
कार्यक्षेत्र-ग्रहणी
विधा -कविता, मुक्तक, ग़ज़ल