चुनावों का मौसम

sunita bishnoliya

बजेंगे ढोल-ताशे भी,
बंटेंगे अब बताशे भी।
खनक सिक्कों की अब होगी,
रौनकें हर कहीं होगी।
आया मौसम चुनावों का…

कोकिलें अब न कूकेंगी
ध्वनि दादुर की गूंजेगी।
अपनी ये राग छेड़ेंगे,
वादों के तीर छोड़ेंगे।
आया मौसम चुनावों का…

झूठ के बीज फूटेंगे-
शाबासी खूब लूटेंगे,
मस्ती के जाम छलकेंगे
नयन भर नीर छलकेंगे।
आया मौसम चुनावों का….

बिना मौसम ही बरसेंगे
खेत बातों के सरसेंगे।
बंधू पैदल ही दौड़ेंगे,
गलियाँ कोई न छोड़ेंगे।
आया मौसम चुनावों का….

कि मौसम है चुनावों का
मौसमी इन हवाओं का-
राहों में वो करें मस्ती,
होती जिसकी बड़ी हस्ती।
आया मौसम चुनावों का..

पिटारा भरके वादों का,
अपने झूठे इरादों का
मुखों से फूल अब  बरसेंगे
फिर तो मिलने को तरसेंगे।
आया मौसम चुनावों का…

महल सपनों के ये देंगे
पानी ऐसा पिला देंगे
मस्ती में लोग झूमेंगे
ये तो कदमों को चूमेंगे।
आया मौसम चुनावों का…

मदारी यों ही डोलेगा
डुगडुगी पीट बोलेगा
भूख सबकी मिटा दूँगा
दोगलापन सिखा दूँगा।
आया मौसम चुनावों का…

#सुनीता बिश्नोलिया

परिचय : सुनीता पति राजेंद्र प्रसाद बिश्नोलिया का स्थाई निवास चित्रकूट,जयपुर(राजस्थान)में है। ५जनवरी १९७४ को सीकर(राजस्थान) में जन्मीं सुनीता जी की शिक्षा-एम.ए. और बी.एड.है। आप अध्यापिका के रुप में डिफेन्स पब्लिक स्कूल(जयपुर)में कार्यरत हैं। साथ ही विद्यालय से प्रकाशित पत्रिका की सम्पादिका भी हैं। आपके खाते में २ साझा काव्य संग्रह प्रकाशनाधीन हैं,जबकि विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं। सामाजिक क्षेत्र में आपने चंडीगढ़ में ५ वर्ष तक बाल श्रमिकों को पढ़ाया एवं मुख्यधारा से जोड़ाl ऐसा ही कार्य यहाँ भी बाल श्रम एवं शोषण मुक्त भारत हेतु जारी हैl आपके लेखन की विधा में गद्य-पद्य(कविताएँ-मुक्तक,यदा-कदा छन्दबद्ध)दोनों ही शामिल हैं तो लघुकथा,संस्मरण, निबन्ध,लघु नाटिकाएँ भी रचती हैंl सम्मान में आपको नारी सेवी सम्मान,उत्कृष्ट लेखिका सम्मान तथा अन्य संस्थाओं की तरफ से कई बार सर्वश्रेष्ठ लेखन हेतु पुरस्कृत किया गया हैl ब्लॉग पर भी अपनी भावनाएं अभिव्यक्त करती रहती हैंl उपलब्धि यह है कि,दसवीं कक्षा का १०० प्रतिशत परिणाम देने हेतु मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा प्रशस्ति-पत्र,विभिन्न विद्यालयों में होने वाली वाद-विवाद प्रतियोगिताओं,लघु नाटिकाओं व अन्य आयोजनों हेतु छात्रों को विशेष तैयारी करवाना,अधिकांशत: प्रथम पुरस्कार एवं कई बार निर्णायक मंडल में भी शामिल रहना हैl आपकी नजर में लेखन का उद्देश्य-अपने ह्रदय में उठती भावनाओं के ज्वार को छुपाने में अक्षम हूँ,इसलिए जो देखती हूँ जो ह्रदय पर प्रभाव डालता है उसे लिखकर मानसिक वेदना से मुक्ति पा लेती हूँl लिखना मात्र शौक ही नहीं,वरन स्वयं अपनी लेखनी से लोगों को गलत के विरुद्ध खड़े होने का संदेश भी देना चाहती हूँ।

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।