
एक जमाना था जब दूरदर्शन और रेडियो पर किसी राष्ट्रीय पर्व या फिर किसी बड़े संकट की स्तिथि में देश के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री राष्ट्र के नाम अपना सम्बोधन देते थे,जिसके अगले दिन प्रिंट मीडिया में भी प्रमुख जगह मिलती थी।लेकिन सामान्य दिनों में उक्त पदों पर आसीन महानुभाव की खबरे कम ही आ पाती थी।अलबत्ता देश मे व्याप्त समस्याओं, आम जन की पीड़ा और समाधान कैसे हो,को लेकर ही चर्चा परिचर्चा व समाचार अखबार, रेडियो व दूरदर्शन की सुर्खियां बनते थे।लेकिन आज हालत बदल गई है ।देश के लगभग चार सौ टेलीविजन चैनलों,हिंदी,अहिन्दी भाषी हजारो की संख्या में छप रहे अखबारों में आये दिन प्रधानमंत्री के राजनीतिक भाषणों की खबर न हो तो बुलेटिन ही पूरा नही माना जाता।लग रहा है जैसे मीडिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भोपू हो गया हो।टेलीविजन के सौ से अधिक चैनल तो अपना दिन सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महिमा मंडन करने में ही बिताते हैं।डिबेट के नाम पर उन्ही के पार्टी कार्यकर्ताओं ओर नेताओ को बुलाकर दिखावे मात्र के लिए गैर भाजपा दलों से किसी को बुलाकर उन्हें नीचा दिखाने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है।अगर कोई आइना दिखाने की कोशिश करता है तो उसकी राष्ट्रभक्ति पर सवाल खड़े कर उसे चुप करा दिया जाता है।परंतु क्या कोई बताएगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले पांच वर्षों में क्या किया?क्या वे सन 2014 के लोकसभा चुनाव के समय किये गए अपने वायदे पूरे कर पाए?क्या उनके चुनावी वायदों को पूरा करने की बाबत एक याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट में उनके द्वारा यह शपथ पत्र नही दिया गया कि चुनावी वायदों को पूरा किया जाना सम्भव नही है?यदि ऐसा है तो क्या यह देश की सवा सौ करोड़ जनता के साथ धोखा नही था?ऐसे में कैसे देश की जनता उनपर फिर से यकीन करें?लेकिन इन सवालों को शायद ही किसी मीडिया ने उठाया हो।मीडिया उठाये भी कैसे,एक चैनल द्वारा राफेल में कथित घपले की बाबत सवाल पूछने मात्र से प्रधानमंत्री कितना नाराज हो गए थे और बेचारे सवाल पूछने वालों पर ही बरस पड़े थे।लेकिन देश की जनता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह पूछने का पूरा हक है कि उन्होंने अपने कार्यालय में बैठकर कितने समय काम किया?शायद ही किसी ने कभी उन्हें अपने कार्यालय में बैठकर देश के लिए काम करते देखा हो,अलबत्ता भाजपा के लिए और अपनी कुर्सी सुरक्षित रखने के लिए वे ऐसा एक भी दिन नही गया जब अखबार की सुर्खियां न बने हो।कभी भाजपा की बात तो कभी मन की बात में ही पांच साल गुजर दिए लेकिन जनता के मन की बात करने की कभी फुरसत नही मिली।जिस देश मे आज भी अन्नदाता किसान आत्महत्या कर रहा हो,मजदूर को मजदूरी न मिल पा रही हो,युवा रोजगार के लिए तरस रहे हो,महिलाओं के सामने इज्जत बचाने का संकट हो,बुजुर्ग उपेक्षित हो और व्यापारी अपने व्यापार को बचाने की जद्दोजहद कर रहे हो ,वहां देश का प्रधानमंत्री उक्त बदतर हालात से निपटने के लिए ठोस उपाय करने के बजाय बेशकीमती सूट पहनकर पुंजिपतियो को फायदा पहुंचाने में जुटा रहे तो इससे बडा दुर्भाग्य ओर क्या हो सकता है।आज देश मे समस्याओं को लेकर बहस होनी बन्द हो गई है।देश की सीमा पर आए दिन शहीद हो रहे जांबाजों को उनके बलिदान का श्रेय देने की बजाए खुद की पीठ थपथपाई जा रही है।इस लोकसभा चुनाव में शायद ही कोई भाजपा प्रत्याशी अपने काम को लेकर वोट मांग रहा हो,मांगे भी कैसे काम तो किया ही नही,इसीलिए मोदी के नाम पर फिर से वोट की भीख का कटोरा उठाये फिर रहे है ,वह भी राष्ट्र वाद की आड़ में,भला इनसे कोई पूछे कि क्या दूसरे दलों के लोग राष्ट्र वादी नही है?क्या वे सब राष्ट्रद्रोही है?गोडसे समर्थक आज राष्ट्रवादी हो गए और गांधी समर्थक राष्ट्रद्रोही।सचमुच यह भारतीय लोकतंत्र का संक्रमण काल ही कहा जायेगा जहां नकटे नाक वालों को नकटा बता रहे है।लेकिन हमें भूलना नही चाहिए कि यह देश सिर्फ बातो और दावो के सहारे चलने वाला नही है।ये पब्लिक है सब जानती है कि अब पाप का घड़ा भर चुका है न जाने कब फूट जाए ,इसलिए अभी भी समय है देश को सुधारने के रास्ते पर चलो ,विपक्षी दलों को भी सम्मान दोऔर जनता के मन की टीस को समझो वर्ना कुर्सी से उतरना तय समझो।फिर कोई कोड़ी के भाव भी नही पूछेगा।
#श्रीगोपाल नारसन
परिचय: गोपाल नारसन की जन्मतिथि-२८ मई १९६४ हैl आपका निवास जनपद हरिद्वार(उत्तराखंड राज्य) स्थित गणेशपुर रुड़की के गीतांजलि विहार में हैl आपने कला व विधि में स्नातक के साथ ही पत्रकारिता की शिक्षा भी ली है,तो डिप्लोमा,विद्या वाचस्पति मानद सहित विद्यासागर मानद भी हासिल है। वकालत आपका व्यवसाय है और राज्य उपभोक्ता आयोग से जुड़े हुए हैंl लेखन के चलते आपकी हिन्दी में प्रकाशित पुस्तकें १२-नया विकास,चैक पोस्ट, मीडिया को फांसी दो,प्रवास और तिनका-तिनका संघर्ष आदि हैंl कुछ किताबें प्रकाशन की प्रक्रिया में हैंl सेवाकार्य में ख़ास तौर से उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए २५ वर्ष से उपभोक्ता जागरूकता अभियान जारी है,जिसके तहत विभिन्न शिक्षण संस्थाओं व विधिक सेवा प्राधिकरण के शिविरों में निःशुल्क रूप से उपभोक्ता कानून की जानकारी देते हैंl आपने चरित्र निर्माण शिविरों का वर्षों तक संचालन किया है तो,पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों व अंधविश्वास के विरूद्ध लेखन के साथ-साथ साक्षरता,शिक्षा व समग्र विकास का चिंतन लेखन भी जारी हैl राज्य स्तर पर मास्टर खिलाड़ी के रुप में पैदल चाल में २००३ में स्वर्ण पदक विजेता,दौड़ में कांस्य पदक तथा नेशनल मास्टर एथलीट चैम्पियनशिप सहित नेशनल स्वीमिंग चैम्पियनशिप में भी भागीदारी रही है। श्री नारसन को सम्मान के रूप में राष्ट्रीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा डॉ.आम्बेडकर नेशनल फैलोशिप,प्रेरक व्यक्तित्व सम्मान के साथ भी विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ भागलपुर(बिहार) द्वारा भारत गौरव
Mon Apr 15 , 2019
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