बढ़ते झूठ से लोकतंत्र खतरे में

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gopal narsan
 पीएम नरेंद्र मोदी नाम से बनी फिल्म में बिना कोई गीत लिखे फिल्म गीतकार जावेद अख्तर का नाम अंकित किये  जाने से स्वयं फिल्म गीतकार जावेद अख्तर हैरान है। उन्होंने फिल्म के ट्रेलर में अपना नाम होने पर आपत्ति भी जताई है ,यही हालत इन दिनों देश की राजनीति की भी है। राजनीति में झूठ जमकर परोसा जा रहा है। क्योंकि इस समय देश में लोकसभा चुनाव चल रहे हैं ,इस कारण एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के साथ ही झूठे वायदों और झूठी उपलब्धियों का बखान किया जाना  आम बात हो गई है। सन 2014 में लोकसभा चुनाव प्रचार के समय भाजपा के शीर्ष नेता नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से वादा किया था कि यदि उनकी सरकार बनती है तो एक माह के अंदर भारत की तस्वीर बदल जाएगी ।उन्होंने काले धन को लेकर जहां विदेश में जमा धन देश में लाने  और प्रत्येक भारतीय खाते में 15 -1500000 रुपए  जमा करने का प्रलोभन दिया था साथ ही उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर बनाने और कश्मीर से धारा 370 हटाने व व्यक्तिगत कानून को  हटाने की बात कही थी। लेकिन इनमें से कुछ भी नहीं हो पाया। केवल नोटबंदी के नाम पर आम जनता को परेशान करने और जीएसटी के नाम पर देश के व्यापारियों को नाको चने चबाने जैसे हालात तो पैदा किए गए  लेकिन ना विदेश से काला धन आया  और ना ही भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र के अनुरूप ठोस काम करके दिखाया अलबत्ता केवल भाषणों में 5 साल गुजार दिए।अब फिर  वही समय है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर, फिर से कुर्सी पाने के लिए देश के सैनिकों की शहादत को भुनाने में लगे हैं और यदि कोई देश हित में देश के वास्तविक हालात को जानना चाहता है, तो उसपर  देशद्रोही होने की तोहमत मढ़ दी जाती है। जबकि जब जब भी देश पर आतंकी हमला हुआ और देश के वीर जवानों ने आतंकियों को कुचलने के लिए ठोस कार्रवाई की उसका देश की जनता ने जोरदार स्वागत किया है। पुलवामा हमला हो या फिर एयर स्ट्राइक  दोनों ही घटनाओं में पूरा देश संकट और बहादुरी के समय एकजुट होकर खड़ा रहा है। लेकिन देश के वीर जवानों के शौर्य को राजनीति के तहत भुनाने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती ।न हीं  देश की रक्षा को राजनीति से जोड़ कर देखना चाहिए। परंतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों को सुनकर लगता है कि जैसे उन्होंने खुद ही दुश्मन देश में जाकर आक्रमण किया हो, उनके मुख से खुद की प्रशंसा तो निकलती है लेकिन जो आए दिन देश की सीमा पर शहीद हो रहे हैं उनके बदले के लिए देश की जनता सन 2014 के उनके बयान को उन्हें याद करा रही है जब उन्होंने  कहा था कि  एक सिर के बदले दस सिर लाकर रहेंगे। यदि अकेले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल को ही देखा जाए तो अभी तक देश पर  करीब 750  जवान शहीद चुके हैं लेकिन दुश्मन देश  का सिर आज तक नहीं कट पाया। उल्टे प्रधानमंत्री दुश्मन देश के राष्ट्रीय दिवस पर वहां के प्रधानमंत्री को बधाई देना नहीं भूलते ।आखिर देश जानना चाहता है कि यह कैसी राजनीति है? दूसरा बोले तो देशद्रोह और खुद बोले तो राष्ट्रभक्ति। भारतीय लोकतंत्र में चुनाव के नाम पर इस तरह की राजनीति निश्चित ही निंदनीय है। चुनाव का मुख्य मुद्दा जाति ,धर्म, क्षेत्रवाद नहीं अपितु विकास होना चाहिए लेकिन इस चुनाव में भी मूलभूत सुविधाओं का मुद्दा गायब है। आत्महत्या कर चुके किसानों का मुद्दा गायब है। मजदूर और महिलाओं के  मुद्दे भी  चुनाव का हिस्सा नहीं बन पा रहे हैं। आज दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि लोग सत्ता के लिए चौकीदार बनने का नाटक कर रहे हैं और कुछ लोग सत्ता के लिए एक दूसरे से हाथ मिला कर गठबंधन की राजनीति कर रहे हैं। इस चुनाव में जीते कोई भी लेकिन लगता है हार जनता की ही होगी। क्योंकि एक बार फिर से  देश की जनता को ठगने की तैयारी पूरी हो चुकी है। देश की जनता को चाहिए कि  वह अपने वोट के हथियार का इस्तेमाल  सोच समझ कर करें और उसी पार्टी को वोट दें जनता की बात करती हो। उनके उत्थान की बात करती हो ।आम आदमी के दुख दर्द की बात करती हो और जो देश को तरक्की के रास्ते पर जा सके और ऐसी पार्टी केवल धर्मनिरपेक्ष पार्टी हो सकती है जो सभी वर्गों व धर्मों को एक साथ लेकर चल सके।बाकी चुनाव आपको करना है ,आप खुद समझदार हैं।
#श्रीगोपाल नारसन
परिचय: गोपाल नारसन की जन्मतिथि-२८ मई १९६४ हैl आपका निवास जनपद हरिद्वार(उत्तराखंड राज्य) स्थित गणेशपुर रुड़की के गीतांजलि विहार में हैl आपने कला व विधि में स्नातक के साथ ही पत्रकारिता की शिक्षा भी ली है,तो डिप्लोमा,विद्या वाचस्पति मानद सहित विद्यासागर मानद भी हासिल है। वकालत आपका व्यवसाय है और राज्य उपभोक्ता आयोग से जुड़े हुए हैंl लेखन के चलते आपकी हिन्दी में प्रकाशित पुस्तकें १२-नया विकास,चैक पोस्ट, मीडिया को फांसी दो,प्रवास और तिनका-तिनका संघर्ष आदि हैंl कुछ किताबें प्रकाशन की प्रक्रिया में हैंl सेवाकार्य में ख़ास तौर से उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए २५ वर्ष से उपभोक्ता जागरूकता अभियान जारी है,जिसके तहत विभिन्न शिक्षण संस्थाओं व विधिक सेवा प्राधिकरण के शिविरों में निःशुल्क रूप से उपभोक्ता कानून की जानकारी देते हैंl आपने चरित्र निर्माण शिविरों का वर्षों तक संचालन किया है तो,पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों व अंधविश्वास के विरूद्ध लेखन के साथ-साथ साक्षरता,शिक्षा व समग्र विकास का चिंतन लेखन भी जारी हैl राज्य स्तर पर मास्टर खिलाड़ी के रुप में पैदल चाल में २००३ में स्वर्ण पदक विजेता,दौड़ में कांस्य पदक तथा नेशनल मास्टर एथलीट चैम्पियनशिप सहित नेशनल स्वीमिंग चैम्पियनशिप में भी भागीदारी रही है। श्री नारसन को सम्मान के रूप में राष्ट्रीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा डॉ.आम्बेडकर नेशनल फैलोशिप,प्रेरक व्यक्तित्व सम्मान के साथ भी विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ भागलपुर(बिहार) द्वारा भारत गौरव

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।