नारी तुम नारायणी

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gulab

शास्त्रों में नारी तुम नारायणी बताया गया है, नारी के बिना ये श्रुस्टी चक्र चल नहीं सकता है, फिर भी नारी को कुरीतियों से जकड़ रखा है, लेकिन डॉ बाबा साहब अम्बेडकर ने महिला ओ को कानूनी अधिकार दिलाया है, नारी को पढ़ाई के लिए और स्वरक्षण के कानून बनाए गए हैं फिर भी आज नारी सलामत नहीं हैं उसका कारण सामाजिक कुरीतियों ही है एसा मे मानता हूं, क्यू की आज भी लड़की के विवाह के लिए दहेज लिया जाता है, पुरुष प्रधान समाज ने सामाजिक रीति रिवाज मे कोई परिवर्तन नहीं आया है, दहेज के लिए कानून बनाने के बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है,
जिस इंसान के घर बेटियाँ जन्म लेती है तब उन्हे दुख इस लिए होता है कि, उसे बड़ा करना और पढ़ाई दिलाने के बाद उसके विवाह की चिंता से वो डर जाता है कि, उसकी शादी मे कितना दहेज देना होगा उसकी जानकारी नहीं है क्यू की आज कल के सामाजिक गोल परग्‍ना ओ ने नियम का पालन करने के लिए उदासीनता सेव रखी है, लड़की के पिता के साथ लड़की के ससुराल वाले कभी कभी इतना खराब व्यवहार करते हैं कि लड़की का पिता मजबूरन उसे
सह लेता है, सही होने पर भी चुपकी बना लेता है,

मनु स्मृति में श्लोक हे,

अपत्यम धर्म कारियानी शु श्रुसा रति रूटमा,
दारा धीन सतथा स्वर्ग पितृ नामअत्म नस ्‍य

मनु स्मृति के यह श्लोक का अर्थ है कि, नारी का कर्म धर्म स्वजन की सेवा में हे,
आज के परिवर्तन युग में नारी ने अपने समाज और संसार के रूप में ये श्लोक का अर्थ नारी ने ध्यान में रखकर स्त्री पुरुष दौनो ने समांतर प्रतिभा शाली व्यक्तित्‍व अपनाकर संसार और भगवान के प्रति अपनी योग्य भूमिका अदा करनी होगी,
नारी धर्म का पालन करना वो पुरुष के कर्म के साथ उसके रक्षण का धर्म जुड़ा हुआ है,
हमे देखने को मिलता है कि व्यवसाय के क्षेत्र में नारी का शोषण होता है, फिल्मों की अश्लीलअता नारी मूल्यों के उपहास के लिए जिम्मेदार है, फिल्मों या टेलीविजन चैनल पर सफलता के लिएनारी का बी भत्स रूप दिखाया जाता है उससे सामाजिक विकरूति उत्पन होती है,
इतिहास में देखा जाय तो धर्म ग्रंथ बताते हैं कि, सती सीताजी को रावण अगवा कर के श्री लंका में ले जाकर बंदी बना लेता है और श्री राम को रावण को युद्ध में पराजित करके सीता जी को वापस लेने मे कितनी परेशानी का सामना करना पड़ा था, आज भी ऎसे रावण समाजमे जिंदा है, लडकियों पर बलात्कार होते हैं, कड़े कानून होने के बावजूद बहुत सारी ऎसी घटनाए देखने को मिलता है,
एक मुहावरा है कि कोई भी सफल पुरुष के पीछे उसकी पत्नी का साथ होता है, क्यू की पुरुष की जिम्मेदारी उठाकर अपने पति के कार्य में आगे बढ़ने के लिए साथ देती है, सरस्वती ये वाणी के स्वरूप में हे जो पुरुष की प्रतिभा की पहचान है, नारी को गृह लक्ष्मी भी माना गया है, नारी घर की शोभा बढ़ा ति हे, नारी घर को सजा ति हे, अपने बच्चोकी देखभाल स्त्री ही करती है, स्त्री दो घर को उजागर करती है माता पिता का घर और ससुराल में जाकर अपने घर को उजागर करती है नारी स्नेह का सागर हे, नारी माया का स्वरूप हे, वो अपने रूप और गुणों से सामने वाले को मोहित कर लेती है,
मध्य कालीन युग में पुरुष प्रधान समाज ने नारी को दाशी या ने की गुलाम बना दिया था, उससे भी बेहतर पाबंदियां लगाए रखी थी, पर्दा डालने की प्रथा, सती होने का रिवाज, दहेज प्रथा जेसे नीयमो से उसका विकास रोकने का प्रयास किया है, मेरा मानना है कि जिस समाज मे पल्लू रखने का रिवाज है और बुरखा पहन नेकी प्रथा है उस समाज की स्त्रियों का विकास कम देखने को मिलता है, मर्यादा के नाम पर स्त्रियों की स्वतंत्रता रोकने का प्रयास आज भी बहुत सारे समाज में देखने को मिलता है, आज भी स्त्रीया पल्लू डालती है और बड़े बुज्‍र्गो के साथ बैठ नहीं सकती है और ऊंचे स्वर में बात भी नहीं कर सकती है, लेकिन अभ्यास के कारण परिवर्तन देखने को भी मिलता है लेकिन वो वहा तक सीमित है,
आधुनिक युग में समाज चेतना आई हे, राजा राम मोहन राय और सामाजिक कार्यकर्ता ओ के प्रयास से स्त्रियों के बंधन में बदलाव आया है, नारी आज पुरुष के समीप ऊँचाइयाँ प्राप्त करने लगी हैं
कुछ ना कहती, सब कुछ सहती, कवि लोग ने कहा है लेकिन ना कुछ कहना और ना कुछ कहना के प्रेरक शक्ति तक पहुच नहीं पाए हैं, नारी स्वयं का दर्पण हे, नारी के भीतर ही भीतर एक ओर नारी पलती है, वह खालीपन की संवेदना को सजाती है, नारी के चरित्र की कसौटी ली जाती है,
आज की नारी परिवर्तन शील है, उसने परिवर्तन की ज्योति जलाई है, वस्त्र पहनने मे, रीत भात, रहन सहन और वैचारिक परिवर्तन हुआ है, मुक्‍त माहोल में जीने लगी है.
चाहे कुछ भी हो लेकिन सामाजिक मूल्यों की रक्षा रक्षा नारी ही कर रही है, मनु स्मृति में नारी को किर्ति के रूप में बताया हे, नारी के सम्मान से ईश्वर का गौरव बढ़ता है, नारी श्री रूप में गिनी जाती है, नारी की वाणी, सरस्वती खुद नारी ही है, उसमे स्मृति का विसिस्‍ट गुण है, नारी बुद्धिजीवी और चेतना का संचार हे, नारी मे धीरज और सहनशीलता भारी पड़ी हुई है, क्षमा तो नारी का आभूषण हे,
नारी को को जगत जननी का पद प्राप्त हुआ है और दूसरा मातृभूमि ये दौनो पद स्वर्ग से भी अधिक है, नारी माता और जन्म भूमि के रूप में अमूल्य हे, देव याने की भगवान की कितनी भी पूजा करे लेकिन माता का अनादर पूजा को व्यर्थ बनाता है, जननी की जोड़ सखी नहीं मिले रे लोल, ऎसा गुजरात में गुजराती लोक गीत हे, मनु स्मृति में कहा है कि जहा नारी की पूजा होती है वहा देवता राजी होते हैं, लेकिन आज के युग में नारी की पूजा नहीं की जाती है, कर्म के आधिन पुरुष और स्त्री की भिन्नता का सर्जन हुआ है, प्रजोत्पाती का कर्म नारी के हिस्से में आया है, संसार को अनंत काल तक चलाने के लिए प्रजोत्पाती का कार्य जरूरी है, स्त्री सर्व गुण का भंडार है, नारी की प्रशंसा उसके गुणों के कारण होती है, संसार और समाज की या परिवार की सेवा उसका महत्‍वपूर्ण गुण है,
रघुकुल रीत सदा चली आई के आधार पर आज स्त्री पर शंका की जाती है और कभी कभी उसको अपना बलिदान देना पड़ता है चरित्रय की शंका की ज्वाला उसे जला देती है,
स्त्री शक्ति का रूप हे, झांसी की रानी लक्ष्मी बाई ने अंग्रेज के सामने लड़कर देश को गुलामी से मुक्ति दिलाने अपना बलिदान दे दिया था, उसकी सेना मे एक जलकारी बाई सेनापति थी उसने झांसी की रानी को लड़ाई में बहुत मदद की थी और अपना बलिदान दिया था लेकिन इतिहास में उसकी नौध नहीं ली है क्यू की वो निचली वर्ण की थी,
नारी के रूप अलग अलग होते हैं वो किसीकी लड़की, किसीकी बहू, किसीकी बहन, किसीकी माँ भी होती है, नारी का एक गुण जिद होती है, रामायण में सीताजी ने लक्षमण के मना करने पर और राम की खींची गई लकीर से आगे न निकल ने की सूचना होने पर भी वो सुनहरी हिरण के लिए जिद करती है, और लकीर के बाहर कदम रखते ही रावण सीताजी को अगवा कर लेता है, उसके लिए राम को रावण से युद्ध करना पड़ता है,
महाभारत में पुरुष के अहंकार के कारण द्रौपदी को सहना पड़ता है, नारी को नारी धर्म शिखा या गया है कि पति ही परमेश्वर हे, नारी अपने पति को परमेश्वर मान कर उसकी सेवा करती है, नारी को कुल लक्ष्मी कहा गया है, नारी को गृह लक्ष्मी भी कहा गया है,
आज नारी के गुण को नहीं उसकी सुंदरता, वस्त्र परिधान याने की नारी के सौंदर्य से मूल्यांकन होता है, लेकिन नारी उसकी चंचलता, सहनशीलता, सौजन्य ता और स्नेह के गुणों के कारण उसे सुशील कहा गया है, नारी ईश्वर ने दी गई अनमोल चीज है, उसके बिना संसार अधूरा है!

#गुलाबचन्द पटेल

परिचय : गांधी नगर निवासी गुलाबचन्द पटेल की पहचान कवि,लेखक और अनुवादक के साथ ही गुजरात में नशा मुक्ति अभियान के प्रणेता की भी है। हरि कृपा काव्य संग्रह हिन्दी और गुजराती भाषा में प्रकाशित हुआ है तो,’मौत का मुकाबला’ अनुवादित किया है। आपकी कहानियाँ अनुवादित होने के साथ ही प्रकाशन की प्रक्रिया में है। हिन्दी साहित्य सम्मेलन(प्रयाग)की ओर से हिन्दी साहित्य सम्मेलन में मुंबई,नागपुर और शिलांग में आलेख प्रस्तुत किया है। आपने शिक्षा का माध्यम मातृभाषा एवं राष्ट्रीय विकास में हिन्दी साहित्य की भूमिका विषय पर आलेख भी प्रस्तुत किया है। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय(दिल्ली)द्वारा आयोजित हिन्दी नव लेखक शिविरों में दार्जिलिंग,पुणे,केरल,हरिद्वार और हैदराबाद में हिस्सा लिया है। हिन्दी के साथ ही आपका गुजराती लेखन भी जारी है। नशा मुक्ति अभियान के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी दवारा भी आपको सम्मानित किया जा चुका है तो,गुजरात की राज्यपाल डॉ. कमला बेनीवाल ने ‘धरती रत्न’ सम्मान दिया है। गुजराती में‘चलो व्‍यसन मुक्‍त स्कूल एवं कॉलेज का निर्माण करें’ सहित व्‍यसन मुक्ति के लिए काफी लिखा है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।