सृष्टि का यह……

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vipin sharma
सृष्टि का यह चक्र अद्भुत है समझ ले,
यह समय के साधकों के संग चला है।
हाथ की रेखाओं के बल जो खड़ा है,
वक्त ने अब तक उसी को ही छला है।
व्यर्थ तेरी कुंडलियों की समय गणना,
अगले पल होना क्या किसने कहा है।
ताश के पत्ते तूफानों में खड़े हैं,
महल पक्की नींव का क्षण में ढ़हा है।
कर्म पर तू रख भरोसा छोड़कर भय,
बस इसी छैनी से तेरा कल ढला है।
सृष्टि का यह….
जब भी तुझको असफलताओं ने घेरा,
दोष तूने भाग्य रेखा पर मढ़ा है।
शिखर पर वह भी है जिसके कर नहीं हैं,
अब बता किन सीढ़ियों से वह चढ़ा है।
जीत जाता मन के बल वह दौड़ कर के,
जो कि जन्म से ही बिन पैरों पला है।
सृष्टि का यह……
रात की परछाई का प्रतिफल सवेरा,
उजियारा पाने को न जगना पड़ा है।
नींद को जब चाहिए तेरे अंधेरा,
रोशनी से तब तू ही लड़ने खड़ा है।
सोंच से तू रेत की परतें हटा दे,
रेत के नीचे ही नीर का सिलसिला है।
सृष्टि का यह…..
विघ्न राहों में मिले कभी थी सुगमता,
इस सफर में न थी तेरे एकरूपता।
तूने किस्मत से नहीं पाई थी सत्ता,
जीत पाया क्योंकि तूझमें थी क्षमता।
उसके हाथों की लकीरें मिट गई हैं,
जिसने हाथों को निराशा में मला है।
सृष्टि का यह……..
विपिन वत्सल शर्मा*
    *सागवाड़ा*
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।