
तेरे आने के इंतज़ार में बिताये हमने हैं कई साल
कैलंडर तो हम बदलते रहे पर मनाया न कभी नया साल
गुजर गए फिर बारह महीने पर सुखा न आसुंओ का सेलाब
अब सजदा भी करूँ कैसे जब तेरे इश्क में हुए हम कंगाल
दिल में सहेज कर बैठे है तेरे वादों की किताब को
आज भी जी रहे हम उन यादों को जो तूने से दिल दी निकाल
न जाने कौन सी तारीख होगी जब होगा ये कमाल
आएगा तू पास मेरे और “हर्ष” मनाये उस दिन नया साल
#प्रमोद कुमार “हर्ष’
मंडी हिमाचल प्रदेश

