अर्जी

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sadhana chirolya
आज फिर अर्जी लगी,
कान्हा तेरे दरबार में।
नीच कर्मों से भी देखो,
नहीं है डरता आदमी,
पाप की गठरी है लादे,
हर कोई फिरता यहीं,
माँ-बहिन की आबरू फिर,
लुट रही बाजार में।।।
आज फिर—-
सजता है बाजार देखो,
स्वार्थ और फरेब का,
लोक और परलोक की,
चिंता किसी को है कहाँ,
बेचकर ईमान अपना,
घूमते बाजार में।।।
आज फिर———-
आदमी ही आदमी को,
रोज ही डँसते यहाँ,
भेड़िये की खाल ओढ़े,
हर कोई दिखता यहाँ,
बाजियाँ शतरंज की तो,
बिछतीं हैं बाजार में।।।।
आज फिर अर्जी लगी,
कान्हा तेरे दरबार में।।।

#श्रीमती साधना छिरोल्या

 दमोह (म.प्र.)

सम्मान- भाषण,नाटक,वाद विवाद,श्लोक,सुलेख,लोकगीत आदि विभिन्न प्रतियोगिताओं में पुरुस्कार।

गहोई समाज एवं हितकारिणी स्कूल जबलपुर द्वारा हिंदी काव्य लेखन के लिये सम्मानित।
 प्रकाशन-गहोई सूर्य अख़बार जबलपुर
गहोई संस्कार पत्रिका जबलपुर(म.प्र.)
गहोई बंधु 
ग्वालियर(म.प्र.)
लोकजंग
लगातार प्रकाशित हो रहीं हैं।

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