ये अँधेरा बहुत डराता है
जबकि इसका होना ही शाश्वत है
बचपन में कहे गये शब्द
अंधेरा काट लेगा
का निहितार्थ जमीन पर उतरता है
शनैः शनैः हाथ बढ़ाता है
तमाम फैले हुए खेतों पहाड़ो जंगलों की ओर
परछाईयां लम्बी होती जाती हैं
रंग स्याह होता जाता है
कितना मुश्किल होता है टटोलना सब कुछ
लेकिन टटोलना भी शाश्वत है
सदैव टटोली जाती रही है
जेब से लेकर हृदय तक
शब्द से लेकर भावों तक
स्पर्श ही लक्ष्य है
स्पर्श की अपनी आँखे हैं
इसकी अपनी भाषा है
हाथ भी छूटते हैं और रिश्ते भी
कितना मुश्किल होता है
किसी पहलू का अनछुआ होना….
#अतुल पाण्डेय
परिचय-
नाम -अतुल कुमार पाण्डेय ‘यायावर ‘पिता का नाम- श्री वेद प्रकाश पाण्डेय ।पता-ग्राम पोस्ट बभनौली पाण्डेय,लार,देवरिया,उप्र।२७४५०२। योग्यता -गणित स्नातकोत्तर ,शिक्षा स्नातक ;प्रवक्ता_-श्री रैनाथ ब्रह्मदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय सलेमपुर ।
Tue Oct 2 , 2018
रिश्ते नाते रीत प्रीत के, खून का रिश्ता फीका हैं। आभासी रिश्ते चलते हैं, दूर का रिश्ता नीका है। दूध का रिश्ता दूर हो रहा, शीश पटल मोहताज हुए। पास पड़ोसी अनजाने से, अनजाने जन खास हुए। भाई – भाई हुए अजनबी, बहने बन गई परायी अब। […]