*चिता*

shirin bhavsar
मेरे होने
या
न होने
के कोई मायने
नही हैं….
वैसे ही
जैसे
चिता पर
निर्जीव
देह….

क्योंकि
मायने
देह के साथ
जुड़े होते हैं
और
देह से
मन…

मन की
अपनी
चाहनाएँ होती हैं
और
अनेक
विवशताएं भी…

इन चाहनाओ
और
विवशताओं
से परे
हो जाना
देह के साथ
आसान तो नही न….

चिता को
निर्जीव देह
का समर्पण
दरअसल
इन्ही
चाहनाओ
और
विवशताओं
का समर्पण हैं….

         #शिरीन भावसार

परिचय:शिरीन भावसार का जन्म नवम्बर १९७५ में तथा जन्मस्थान-इंदौर (म.प्र.) हैl आपने एम.एस-सी. (वनस्पति विज्ञान) की शिक्षा रायपुर (छग) में ली है,और शादी के बाद वर्तमान में वहीँ निवासरत हैंl कार्यक्षेत्र की बात करें तो आप कला-शिल्प तथा लेखन में सक्रिय होकर सामाजिक क्षेत्र में दृष्टि बाधित संस्था और विशेष बच्चों की संस्था से जुड़ी हुए हैंl लेखन में आपकी विधा-नई कविता,छंदमुक्त कविता,मुक्तक एवं ग़ज़ल हैl कई समाचार पत्र-पत्रिकाओं सहित वेबपत्रिका में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैंl आपके लेखन का उद्देश्य-अपने विचारों को दृढ़ता से रखना,सामाजिक मुद्दों को उठाना,मनोभाव की अभिव्यक्ति और आत्मसंतुष्टि हैl

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