अजीब औरत है पति नहीं है और मना रही है शादी की सालगिरह….।
ओर नहीं तो क्या देखा नहीं बेटे की शादी में…. कैसी बन – संवरकर पार्लर से तैयार होकर आई थी मैडम।
हद है यार….तीसरी ने तंज कसा ।
तभी पिंकी को सामने पाकर सब चुप हो गई।
अरे भई,इतना सन्नाटा क्यों है?पिंकी ने कहा तो सब एक-दूसरे का मुँह ताकने लगी।
मुझे पता है मेरी प्यारी सहेलियां क्या सोच रही होगी।पिंकी ने चुप्पी तोङी।
चलो आज मैं अपने जीवन के कुछ राज आपके हवाले कर देती हूँ।
सभी सहेलियों के कान खङे हो गए।
अपने जीवन साथी के बिछुङने का दुख सिर्फ वहीं जानता है जिसने उसे खोया है।आज विरेन्द्र होते तो हमारी शादी को पचास साल हो जाते वो जश्न कैसा होता कहने की आवश्यकता नहीं….। पर आज अगर वे नहीं है तब भी उस शादी के बाद हम बरसो साथ रहे…..दो प्यारे बच्चे है हमारे।एक बूढी सास जो हर हाल में मेरी खुशी का ख्याल रखती है।आज उन्होंने आप सबको बुलाया ताकि मैं खुश रह सकूं सहेली से ज्यादा प्रिय किसी स्त्री को ओर क्या होगा उन्होंने कहा था।
उनकी खुशी के लिये साज श्रृंगार सब किया है मैंने…।
वैसे भी मेरे पति मुझे बहुत कुछ देकर गये है जिसके सहारे जिन्दगी ठीक- ठाक काटी जा सकती है।
अब आप लोग ही बताओ जो मिला है उसकी खुशी मनाऊँ या जो नहीं है उसका गम…।
अरे हाँ,मैं तो बेकार की बातों में उलझ गई।आप लोग खाना खाकर जाना..।
वहाँ खङी औरतों ने जिन्दगी की लंबी छलांग को साफ-साफ महसूस किया।
डॉ पूनम गुजरानी
सूरत(गुजरात)
पीएचडी एम ए
काव्य संग्रह प्रकाशित
मझधार
समय क्षण भर रूक गया
कई सम्मान. पुरस्कार प्राप्त
मोटीवेशन कार्यक्रम
कवि सम्मेलनो में सहभागिता