असमः विरोधियों की नौटंकी

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vaidik
कांग्रेस पार्टी देश की सबसे बड़ी विरोधी पार्टी है लेकिन उसके नेता कितने भौंदू सिद्ध हो रहे हैं ? उनके भौंदूपन ने सारी विरोधी पार्टियों की हवा निकाल दी है। कल तक कांग्रेस असम में नागरिकता के सवाल पर भाजपा सरकार की भर्त्सना कर रही थी। राहुल गांधी और ममता बेनर्जी सुर में सुर मिलाकर राग अलाप रहे थे। नाम लिये बिना दोनों यह कहने की कोशिश कर रहे थे कि भाजपा सरकार ने जिन 40 लाख लोगों को भारतीय नागरिक नहीं माना है, वे सब मुसलमान हैं। अर्थात भाजपा सरकार असम में हिंदू सांप्रदायिकता का नंगा नाच रचा रही है। अब तीन दिन बाद कांग्रेस के नौसिखिया नेता को बुजुर्ग कांग्रेसियों ने समझाया कि बेटा, तुम्हारा यह दांव उल्टा पड़ रहा है। अगर तुम्हारे बयान से प्रभावित होकर असम और बंगाल के कुछ मुस्लिम मतदाता कांग्रेस के साथ आ भी गए तो सारे देश के हिंदू मतदाता भाजपा की तरफ खिसक जाएंगे। ध्रुवीकरण हो जाएगा। यही बात कार्यसमिति में विशेष आमंत्रित असमिया नेताओं ने कही। उन्होंने यह भी बताया कि नागरिकों की तकनीकी भूल-चूक के कारण 40 लाख में बहुत-से हिंदुओं, बंगालियों, राजस्थानियों आदि का भी पंजीकरण नहीं हो सका है। इस पर राहुल गांधी ने पल्टी खाई और कांग्रेस प्रवक्ता ने घोषित किया कि कांग्रेस सरकार ने 2005 से 2013 के बीच 82728 बांग्लादेशियों को अवैध घुसपैठिए कहकर निकाल बाहर किया जबकि पिछले चार साल में भाजपा सरकार ने सिर्फ 1822 को बाहर निकाला। याने भाजपा डाल-डाल तो कांग्रेस पात-पात ! मनमोहन सिंह सरकार ने 2009 में 489 करोड़ रु. खर्च करके लोगों की नागरिकता की जांच के लिए 25000 कर्मचारी नियुक्त किए थे। अर्थात भाजपा असम में जो कर रही है, वह ठीक कर रही है। हम बेवकूफ बन गए। हमें माफ कर दीजिए। लेकिन कांग्रेस ने कोई सबक नहीं सीखा। अब वह मुजफ्फरपुर में बच्चियों के साथ हुए बलात्कार का विरोध करते हुए सारा ठीकरा भाजपा के माथे फोड़ रही है। केंद्र की भाजपा सरकार का उससे क्या लेना-देना ? मुख्यमंत्री नीतीश ने जो भी जरुरी कार्रवाई हो सकती है वह कर दी है। अच्छा होता कि इस राक्षसी कुकर्म का विरोध करते हुए विरोधी दल सत्तारुढ़ दलों को भी शामिल करते। तब उनका विरोध सच्चा विरोध कहलाता। अभी तो वह नौटंकी-जैसा लगता है।
                                                                      #डॉ. वेदप्रताप वैदिक

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।