स्वस्थ्य भारत के लिए स्वच्छता जरूरी

devendr soni

स्वच्छता केवल भारत के लिए ही नहीं अपितु समाज , घर और हर व्यक्ति के लिए जरूरी होती है। अब तो इसे अभियान के रूप में भी चलाया जा रहा है।
अनेक संस्थाएं भी इस दिशा में जन सामान्य को जाग्रत करने की दिशा में पहल कर रही हैं जिसके परिणाम भी सबकी सहभागिता के रूप में परिलक्षित हो रहे हैं ।
देश में व्याप्त गंदगी और फैलती महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य के परिप्रेक्ष्य में सबसे पहले यदि देशवासियों को स्वच्छता का संदेश किसी ने दिया था तो वे थे महात्मा गांधी जिन्होंने स्वयं अपना मैला ढोकर और अपने साथियों के साथ अन्य स्थानों की स्वच्छता का कार्य प्रारंभ किया था ।
उनके इस अभियान की विस्तृत चर्चा न करते हुए यहां मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ की स्वच्छता से स्वास्थ्य का सीधा सम्बंध होता है ।
हम सब अपनी और अपने घरों की साफ सफाई का तो ध्यान रखते ही हैं लेकिन अनेक ऐसे घर – परिवार भी हैं जो आज भी कूड़ा कचरा सड़कों पर ही फेंकते हैं । यही नहीं , व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के अतिरिक्त कुछ विकृत मानसिकता के लोग सार्वजनिक स्थानों को भी अपनी बपौती मानकर उन्हें जान बूझकर गंदा करते हैं । चाहे वे सार्वजनिक शौचालय हों या रेल के प्रसाधन स्थल । आलावा इसके यहां – वहां पान – तम्बाकू की पीकेँ भी इनकी विकृत कला का उदाहरण होता है।
यही सब देखते हुए सरकारी स्तर पर अब ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है । कचरा इकट्ठा करने हेतु घर तक आती गाड़ियां , सार्वजनिक स्थलों को गंदा करने पर सजा और जुर्माना आदि के प्रावधानों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है । स्वच्छता दूत भी बनाए जा रहे हैं जो इन सब पर नजर रखते हैं लेकिन क्या यह पर्याप्त है ?
सरकार लाख प्रयास कर ले , करोड़ों अरबों की योजनाएं और अनुदान संस्थाओं को या व्यक्तिशः वितरित कर दे फिर भी जब तक नागरिक अपने कर्तव्य नहीं समझेंगे तब तक सब बेमानी ही होता है । आंशिक सफलता का व्यापक प्रदर्शन वाह वाही तो दे सकता है मगर यह किसी को भी अच्छा स्वास्थ्य नहीं दे सकता ।
अच्छे स्वास्थ्य और स्वस्थ भारत के लिए जरूरी है हम सिर्फ और सिर्फ सरकारी योजनाओं का गुणगान ही न करें बल्कि खुद में भी परिवर्तन लाएं । इसके लिए जरूरी है स्वच्छता के मूलभूत सिद्धान्तों पर ध्यान दें ।। सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी फेंकने और करने वालों को उचित सबक सिखाएं या इसकी सूचना सम्बंधितों को देकर अपने कर्तव्य का निर्वहन करें , तभी स्वच्छता और स्वास्थ्य को बचा सकेंगे , अन्यथा जो चलता है वह तो चलता ही रहेगा।

#देवेन्द्र सोनी , इटारसी

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।