हे माँ शारदे,
हमें ऐसा वर दे
ज्ञान के
चक्षु खोल दे,
तम छाया है
अज्ञान की
अंधेरी नगरी
की यहाँ,
चारों तरफ
माया है,
यहाँ ज्ञान के मंदिर
बहुत बने पड़े हैं,
यहाँ रोज
द्वार भी खुलते हैं,
गुरु और शिष्य भी
यहाँ रोज मिलते हैं,
लेकिन यहाँ पहले
जैसी कोई बात नहीं,
विद्यालय का
वातावरण बदल
गया है,
गुरु और शिष्य का
नाता पहले जैसा
नहीं रहा है।
यह हम नहीं,
सारा समाज
कह रहा है॥
#आर.डी.वैरागी
परिचय : श्री रमेशदास पिता तुलसीदास का जन्म ग्राम कल्याणपुरा जिला झाबुआ (म.प्र.) के छोटे से कस्बे में हुआ है। आप लेखक के रुप में ‘उधार’ नाम से जाने जाते हैं,जिनका जीवन सादा और विचार क्रांतिकारी हैं। लम्बे समय तक सरकारी कर्मचारी होने की वजह से इनकी रचनाओं में सरकार से जुड़े कामकाज और राजनीति पर काफी कुछ पढ़ने को मिलता है। आर.डी.वैरागी स्वभाव से अंतर्मुखी होकर जीवन का होशपूर्ण व्यापन करने की बात कहते हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य समाज को जागृत करना और हिन्दी भाषा को बढ़ावा देना है। काफी लम्बे समय तक सरकारी कर्मचारी होने की वजह से उनकी रचनाओं में सरकार से जुड़े कामकाज और राजनीति पर काफी कुछ व्यंग्य पढ़ने को मिलते हैं, जिससे पाठक सोचने पर मजबूर होता है। इन्होंने अपनी रचनाओं में जीवन से जुड़े लगभग सभी तथ्यों पर विचारों को बेधड़क लिखा है।
Mon Jan 22 , 2018
हम बालक नादान मैया,तेरी शरण में आए हैं। दे दो हमको ज्ञान जरा-सा,तुझे रिझाने आए हैं॥ तू करूणा स्वरूपिनि माँ,तू ही ज्ञान की दाता है। छोड़ कहाँ हम जाएं तुझको,तू ही हमारी माता है॥ रिश्ता है ये पावन अपना,तुझे बताने आए हैं… ना कोई मंजिल हमारी,ना राहों का है पता। […]