मोहपाश से मुक्ति

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shweta jayaswal

  मैं मोहपाश में बंधा हुआ,

खुद से ही मैं छला गया,
न कोई समुद्र मंथन था,
न मोहिनी रूप धर,
देव घर मे आए थे,
पर फिर जाने कैसे,
मैने अपने होश गवाए थे,

मेरे हिस्से अमृत आया,
या है ये गरल का प्याला,
छोभ करू मैं इस निर्णय पर,
या हो जाऊ मद मे मतवाला,

अंतः नगरी मे भी तो देखो,
कितने मंथन होते हैं,
कौन किसे कैसे मिले,
प्रारब्ध लिखे होते हैं,

ये गरल है या अमृत
इसका कैसे चयन करू,
जो आया हृदय पे बोझ,
उसको कैसे वहन करू,

है नही ये मृत्यु,
पर ये जीवन आसान नही,
मेरी इस पीडा का,
लगता कोई निदान नही,

तुम ही आओ मेरे सम्मुख,
मेरी पीडा का हरन करो,
आओ थोड़ा समीप मेरे,
थोड़ा मेरा स्मरण करो,

मोहपाश मे तुम्हारे हूं तो,
मुक्ति तुम्ही दिलाओगी,
आग्या नहीं, अनुरोध समझो,
कहदो,
एक बार मुझसे मिलने आओगी.

 नाम- श्वेता जायसवाल 
साहित्यिक उपनाम -श्वेता 
वर्तमान पता -मण्डला (म. प्र.) 
राज्य -म. प्र. 
शहर -मण्डला 
शैक्षणिक योग्यता -स्नातक 
कार्य क्षेत्र -ग्रहणी 
विधा -कविता मुक्तक 
उपलब्धि -youtuber 
लेखन का उद्देश्य -name ,fame, money 

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