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मयकदे की शराब हो जाते
आप थोड़े ख़राब हो जाते
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ख़ार होते नहीं जो दामन में।
आप बेशक गुलाब हो जाते।
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कनखियों से जोे देखती तुमको।
उस हसीं का हिजाब़ हो जाते।
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जिसमें क़लमा रहे मुहब्बत का।
ऐसी कोई किताब… हो जाते।
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इक नज़र प्यार की तू कभी डाले।
आशना बेहिसाब …….हो जाते।
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पड़ गया जो अकाल धरती पे।
हम नदी फिर चिनाब हो जाते।
#सुनीता उपाध्याय `असीम`
परिचय : सुनीता उपाध्याय का साहित्यिक उपनाम-‘असीम’ है। आपकी जन्मतिथि- ७ जुलाई १९६८ तथा जन्म स्थान-आगरा है। वर्तमान में सिकन्दरा(आगरा-उत्तर प्रदेश) में निवास है। शिक्षा-एम.ए.(संस्कृत)है। लेखन में विधा-गजल, मुक्तक,कविता,दोहे है। ब्लॉग पर भी लेखन में सक्रिय सुनीता उपाध्याय ‘असीम’ की उपलब्धि-हिन्दी भाषा में विशेषज्ञता है। आपके लेखन का उद्देश्य-हिन्दी का प्रसार करना है।
Thu Jun 7 , 2018
आज देश का परिधान बदल रहा, बदल रही देश की काया है। हम जानकर भी अनजान हैं, सब समय समय की अद्भुत माया है।। देश की संस्कृति विलुप्त हो रही, विलुप्त हो रही मानवता की प्रेम सुधा। हम जानकर भी अनजान हैं, कंकड़ पत्थर की भी व्यथा कहे विसुधा।। ये […]