राज़ी
कलाकार :-आलिया भट्ट, विकी कौशल, रजित कपूर, करण एहलावत, शिशिर शर्मा,
निर्देशक :- मेघना गुलज़ार
संगीत :- शंकर, एहसान लॉय
इदरीस खत्री द्वारा ,,,,
फ़िल्म निर्दशिका मेघना गुलज़ार,(बोस्की) पर फ़िल्म के पहले एक चर्चा ज़रूरी है,
राखी और फ़िल्म कार, गीतकार गुलज़ार साहब की इकलौती पुत्री है|
अपने पिता की फ़िल्म माचिस, हूँ तू हूँ मै सहायक निर्देशक काम कर चुकी है,
न्यूयार्क से फ़िल्म का अध्धयन किया,
संजय गुप्ता की दस कहानियां में से अमृता सिंह वाली कहानी निर्देशित कर चुकी है,
2002 में फ़िल्म फिलहाल निर्देशित कर चुकी है, 2007 में जस्ट मैरिड, के अलावा दूरदर्शन के लिए एक दस्तावेजी फ़िल्म पूरनमासी भी बना चुकी है,
तलवार फ़िल्म से वह स्वयं को सिद्ध कर चुकी है,
काम के नाम पर ज्यादा कुछ नही लेकिन इस इंडस्ट्री में अधिक या कम काम सफलता या रचनात्मकता का पैमाना नही रहा है|
मेघना बेहद संजीदगी की भट्टी से तप के निकली हुई निर्देशिका है, इसका उदाहरण हम फ़िल्म तलवार में देख चुके है
कहानी के पहले फ़िल्म के संदेश पर बात कर लेते है
जंग में केवल जीत केवल जंग की होती है
|हार होती है इंसानियत की, रिश्तों की, परिवारों की, इंसानो की
हिन्दुस्तान में हिदायत खान(रजित कपूर) देश के लिए पाकिस्तान की जासूसी करते है लेकिन अब उनको बीमारी हो गई है जिसके चलते वह देश की खिदमत करने में असमर्थ होते जा रहे है तो वह अपनी बेटी सहमत(आलिया भट्ट)को भारत के आंख, कान, बना कर पाकिस्तान भेजना चाहते है
तो वह पाकिस्तान में उनके दोस्त परवेज सय्यद(शिशिर शर्मा) जो कि वहा की सेना में बड़े ओहदे पर है उनका बेटा इकबाल (विकी कौशल) से जो कि फ़ौज में ही है से शादी कर दी जाती है पाकिस्तान मर जासूसी के लिए सहमत को ट्रेनिंग दी जाती है जो कि बशीर एहमद (जयदीप एहलावत) देते है|
फिर सहमत व्याह के पाकिस्तान जाती है, ओर शुरू होटी है जासूसी पाकिस्तान की
एक आम इंसान जो खून को देख को देख कर खोफ कहा जाए और उस शख्स को खून ही करना पड़े तो उसकी मानसिक स्तिथि केसी होगी यह मेघना ने बड़ी सुंदरता से पिरोया है लेकिन इस काम मे सहमत अपना सब कुछ खो देती है
और ज़िंदगी की एक किरण लेकर दुनिया से खुद को दूर कर लेती है
पटकथा शानदार है,
अदाकारों में आलिया ने एक बार फिर खुद को साबित किया साथ ही पूरी फिल्म को संजीदगी से लेकर निकल गई, उसकी अभिनय क्षमता अद्वितीय है, रंजीत कपूर, शिशिर शर्मा, विकी कौशल, यहां तक कि फ़िल्म का हर पात्र सटीक और उपयुक्त था
फ़िल्म हरिंदर सिंह के नावेल कॉलिंग सहमत पर आधारित थी
मेघना, आलिया ने बड़ी सहजता से खुद को सिद्ध किया
संगीत शंकर एहसान लॉय का हैं जिसमे गाने राजी, दिलबरो, के वेतन कानो से होते हुवे दिल तक पहुचते है
#इदरीस खत्री
परिचय : इदरीस खत्री इंदौर के अभिनय जगत में 1993 से सतत रंगकर्म में सक्रिय हैं इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं| इनका परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग 130 नाटक और 1000 से ज्यादा शो में काम किया है। 11 बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में लगभग 35 कार्यशालाएं,10 लघु फिल्म और 3 हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। इंदौर में ही रहकर अभिनय प्रशिक्षण देते हैं। 10 साल से नेपथ्य नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं।