मुकद्दर से लेकर इजाज़त

dipendr

न अब एक भी लम्हा खारा करेंगे,
हम आँसू भी मीठे बहाया करेंगे ।
वहीं तक ये रस्ते मेरे नाम हैं बस ,
कि जुगनू,जहाँ तक उजाला करेंगे ।
ये सोचा है अब मैकदे छोड़कर हम,
तुम्हारे तसव्वुर में बहका करेंगे ।
मुकद्दर से लेकर इजाज़त ही अब,
नया कोई रिश्ता हम बनाया करेंगे ।
इन अश्कों को दे दी जो थोड़ी इजाज़त,
तो महफ़िल में तेरी तमाशा करेंगे।

अभी मरहमों को तकल्लुफ न देना,
वो मेरी तरफ फिर निशाना करेंगे।

अगर शायरी का हुनर आ गया तो ,
ये पत्थर से दिल भी तराशा करेंगे ।

  #दीपेंद्र सिंह

 

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