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पावनी नर्मदा
Fri Feb 2 , 2018
शिव शंकर सुता नर्मदा कृति तुम अजब निराली हो, खुद के अस्तित्व से जूझ रही संपूर्ण होकर भी खाली हो। तुम शतरूपा तुम रेवा हो, तुम रामायण की सीता हो तुम हो गरिमामई सावित्री तुम ही पावन गीता हो। उग्र होकर लगे बवंडर, थम जाओ तो दिखे समंदर हठयोगी-सी तुम […]

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