काव्य कुँअर 2026 और काव्य दीप सम्मान समारोह सम्पन्न

23 नवोदित कवियों को काव्य दीप सम्मान एवं कवि देवकृष्ण व्यास स्वर्णाक्षर सम्मान से सम्मानित

जब तक लिखने वाला बेचैन नहीं होगा, वह कवि नहीं हो सकता- श्री व्यास

इन्दौर। सुप्रसिद्ध कवि डॉ. कुँअर बेचैन जी की जन्म जयंती पर मातृभाषा उन्नयन संस्थान व डॉ. कुँअर बेचैन स्मृति न्यास, ऑस्ट्रेलिया द्वारा बुधवार को प्रीतमलाल दुआ सभागार में काव्य कुँअर व काव्य दीप सम्मान समारोह आयोजित हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि सांसद शंकर लालवानी व अध्यक्ष देवकृष्ण व्यास रहे, साथ ही, वरिष्ठ पत्रकार हरिश फतेहचन्दानी व लोकप्रिय गीतकार अमन अक्षर विशिष्ट अतिथि रहे।
अतिथि स्वागत प्रदीप जोशी, नितेश गुप्ता, संजय त्रिपाठी, डॉ. संध्या सिलावट ने किया। शब्द स्वागत मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ’अविचल’ ने किया। भरत कुमार उपाध्याय ने डॉ. कुँअर बेचैन के जीवन पर प्रकाश डाला। तदुपरान्त अतिथियों ने वरिष्ठ कवि देवकृष्ण व्यास को स्वर्णाक्षर सम्मान से सम्मानित किया।

मुख्य अतिथि शंकर लालवानी ने कहा कि ‘अमृतकाल के भारत में युवा ही महत्त्वपूर्ण हैं और युवाओं को अपने कार्य से पहचान बनानी चाहिए। रचनाकारों की लेखनी देश के प्राण हैं।’
हरीश फतेहचंदानी संबोधित करते हुए कहा कि ‘सरकार चाहे कोई भी हो, कवियों को निर्भय रहकर अपने भाव लोगों तक पहुँचाना चाहिए।’
अमन अक्षर ने कहा कि ‘आज कुँअर बेचैन जी का स्मरण इन्दौर में करना हमारी पीढ़ी का सौभाग्य है, हमें डॉ. बेचैन जी की तरह सहज भाव से लेखन करना चाहिए।’
अंत में अध्यक्षता कर रहे श्री व्यास ने कहा कि ‘आप लिखें, ख़ूब लिखें पर लिखते समय हृदय में राष्ट्र रखना। और जब तक लिखने वाला बेचैन नहीं होगा, वह कवि नहीं हो सकता और तालियाँ किसी कविता की सफलता नहीं तय करतीं।’

कार्यक्रम संचालन डॉ. अखिलेश राव ने किया व अंत में आभार कवि चेतन जोशी ने माना। हिन्दी आंदोलन, हिन्दीग्राम व मातृभाषा डॉट कॉम के सहयोग से सर्जना का सम्मान हुआ। इस अवसर पर अरविंद तिवारी,शिशिर उपाध्याय, डॉ. नीना जोशी, दिनेश दवे, श्याम कामले, अनिता बिरला, स्वाति सिंह साहिबा, कल्याणी गुप्ता, नैवेद्य पुरोहित, प्रमोद दीक्षित, विनीता तिवारी, लक्ष्मीकांत पंडित, मार्टिन पिंटो, शिवम सिंह, वैदिक पराशर, वेदांत चतुर्वेदी आदि सुधिजन मौजूद रहे।

काव्य दीप सम्मान से ये कवि हुए सम्मानित:
उज्जैन से प्रशांत व्यास ‘रुद्र’, फ़तेहपुर से सुंदरम फ़तेहपुरी, नरसिंहपुर से मेघा मिश्रा, बालाघाट से माही शुक्ला, आष्टा से अंकित शर्मा, मंदसौर से अभिषेक सोलंकी व सुभाष बोराना, सनावद से गौरव पटेल नीलकंठ व श्रीधरा पटेल, सोनगढ़ से नारायण कुमावत, सिवनी से राज तेकाम, कसरावद से गौतम रावल, टोकसर से अजय वर्मा एवं इंदौर से प्रशांत राव चौरसे, हिमांशु मंगला वर्मा, पवन जोशी, कुलश्रेष्ठ शर्मा, प्राची शर्मा, निशिका नागर, डॉ. आभांश शर्मा, गोपाल सोलंकी इंदौरी, विशाल शर्मा ‘जानिब’ व यश शुक्ला को संस्थान द्वारा काव्य दीप सम्मान से सम्मानित किया।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।