युग

rajeshwari
त्रेता युग बीता घोर कलयुग आया,
दम घुटने लगा इंसान का
प्रकृति के खिलाफ जाकर
सांसों के भी लाले पड़ गए।
जहरीली बन गई हवा भी,
पर्यावरण को ख़तम किया
इंसान में से ख़त्म भावनाएं,
मोबाईल का गुलाम बना।
इंसानी रिश्ते हुए चकनाचूर,
जानवरों को साथ लिया
खुद का अपनापन खो डाला,
पुरखों को नजरअंदाज किया।
कार्टूनों की दुनिया में बसकर,
मस्तिष्क को कब्रिस्तान किया
कुछ भी उल्टा-सुल्टा खाकर,
हाथी-सा अभिमान किया।
बना मशीन का दास आदमी,
और खुद को सम्मान दिया
अजन्मे को भविष्य दिखाता,
कैसा मूर्ख गुमान किया।
नोटों की ढेरी पर बैठा था,
खुद को खुदा मान लिया
परतन्त्र हुआ पल-पल रोया,
देखो कैसा हाल हुआ।
एक-दूजे को खाता आदमी,
अपना-पराया भूल गया
गूगल पर ढूंढे दूध के रिश्ते,
नासमझ अपने और पराए।
फेसबुक की दुनिया ही,
अपनी,ये कैसा परिवार हुआ
मशीनी दुनिया में निकृष्ट,
देखो सभ्यता का हास हुआ।
झुक गए कंधे,
सब-कुछ छूट गया
सब-कुछ कचरा बना,
ये कैसा अंतकाल हुआ॥
        #श्रीमती राजेश्वरी जोशी

परिचय : श्रीमती राजेश्वरी जोशी का निवास अजमेर (राजस्थान) में है। आप लेखन में मन के भावों को अधिक उकेरती हैं,और तनुश्री नाम से लिखती हैं।

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किसान

Sat Jan 27 , 2018
आओ बच्चों तुम्हें सुनाऊँ,कहानी एक किसान की, धूप-छाँव सह करता खेती,गेहूँ,मक्का धान की। सुबह सवेरे जल्दी उठता,फिर अपने खेतों में जाता, घूम-घूमकर क्यारी-क्यारी,फसलों से वो बातें करता। लिए फावड़ा नित हाथ में,डौल-डौल पर डोल रहा, एक क्यारी में नाका खोले,एक में पानी बंद कर रहा। बढ़ जाती जब घास खेत […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।