हम बालक नादान मैया

budhhi prakash
हम बालक नादान मैया,तेरी शरण में आए हैं।
दे दो हमको ज्ञान जरा-सा,तुझे रिझाने आए हैं॥
तू करूणा स्वरूपिनि माँ,तू ही ज्ञान की दाता है।
छोड़ कहाँ हम जाएं तुझको,तू ही हमारी माता है॥
रिश्ता है ये पावन अपना,तुझे बताने आए हैं…
ना कोई मंजिल हमारी,ना राहों का है पता।
तेरे चरणों में हम आए,तू ही हमको राह बता॥
भूले भटके ना कभी हम,तुझे मनाने आए हैं…
हम अज्ञानी बालक तेरे,ज्ञान हमें कुछ ना रहा।
स्वर-शब्दों को कैसे सीखें,अँधियारा भी  छा रहा॥
मन मंदिर में ज्योति जलाने,तेरे द्वारे आए हैं…
माता-पिता गुरुदेव का हम,जीवनभर सम्मान करें।
देश की रक्षा करें सदा हम,मन में नव उत्थान भरें॥
ऐसा दो वरदान ‘मन’ को,हाथ पसारे आए हैं…
हम बालक नादान मैया,तेरी शरण में आए हैं॥

#बुद्धि प्रकाश महावर ‘मन’

परिचय : बुद्धि प्रकाश महावर का साहित्यिक उपनाम-मन है। आपकी जन्म तिथि-३ जुलाई १९७६ है। वर्तमान में-जिला दौसा (राजस्थान) के ग्राम मलारना में रहते हैं। शिक्षा- एम.ए.(हिंदी) तथा बी.एड. है। कार्यक्षेत्र में अध्यापक हैं। सामाज़िक क्षेत्र में-सामाजिक सुधार कार्यों,बेटी बचाओ जैसे काम में सक्रिय रहते हैं। आप लेखन विधा में कविता,कहानी,लघुकथा, ग़ज़ल,गीत,बाल गीत आदि रचते हैं। प्रकाशन में ‘हौंसलों के पंखों से'(काव्य संग्रह) तथा ‘कनिका'( कहानी संग्रह)आ चुका है।  उपलब्धि-सम्मान के तौर पर बाल मुकुंद गुप्त साहित्यिक सम्मान-२०१७, राष्ट्रीय चौपाल साहित्यिक सम्मान-२०१७ और राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था द्वारा ‘तोषमणि’ अलंकरण मिलना है। आपकी नजर में लेखन का उद्देश्य-सामाजिक एवं राष्ट्रीय जागृति,आत्मखुशी और व्यक्तिगत पहचान बनाना है।

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