हर हकीकत रूबरू होने लगी।
रंज की जब गुफ्तगू होने लगीll
खिल गया जब प्यार का इक बीज भी।
नफरतें फिर चारसूं होने लगीll
अब नहीं महफूज़ है कोई यहाँ।
बालिका बे-आबरू होने लगीll
पर्व कोई हम मनाएँ जब कभी।
ईश की फिर तू ही तू होने लगीll
मिल गया जो हमनवां कोई हसीं।
जिन्दगी तब सुर्खरू होने लगीll
#सुनीता उपाध्याय `असीम`
परिचय : सुनीता उपाध्याय का साहित्यिक उपनाम-‘असीम’ है। आपकी जन्मतिथि- ७ जुलाई १९६८ तथा जन्म स्थान-आगरा है। वर्तमान में सिकन्दरा(आगरा-उत्तर प्रदेश) में निवास है। शिक्षा-एम.ए.(संस्कृत)है। लेखन में विधा-गजल, मुक्तक,कविता,दोहे है। ब्लॉग पर भी लेखन में सक्रिय सुनीता उपाध्याय ‘असीम’ की उपलब्धि-हिन्दी भाषा में विशेषज्ञता है। आपके लेखन का उद्देश्य-हिन्दी का प्रसार करना है।