मन प्रफुल्लित अब होत बलिहारी
गलियन गलियन कूँचे किलकारी
नैनन से तुम अब करिहौ बातै
श्याम शलौने गीत सुनाके
मोरे मनवा में तुमने डाका डाला
ऐसे गया अब वो हरसा के
पकडे मोरे वो कलाई रसिया
मन इतराय अब रह रह के
जानौ अब ना कौनो बतिया
वो गये है अब प्रीत रचाके
प्रेम में उनके तड़प रही हूँ
विरह की अब ना कटे रतिया
पूनम रात्रि अब वो शर्माने
चन्द्र देखू यू देखू कृष्णा
मन में उठती है अब तृष्णा
मुझको कुछ ना समझ आए
प्रीत पराई तुम्ही जानौ
मै तुम्ही को सजना मानौ
मोही तो कुछ ना देई सुझाई
सब रूपन मा तुम्ही गोसाईं।।
परिचय :
नाम-. मो.आकिब जावेद
साहित्यिक उपनाम-आकिब
वर्तमान पता-बाँदा उत्तर प्रदेश
राज्य-उत्तर प्रदेश
शहर-बाँदा
शिक्षा-BCA,MA,BTC
कार्यक्षेत्र-शिक्षक,सामाजिक कार्यकर्ता,ब्लॉगर,कवि,लेखक
विधा -कविता,श्रंगार रस,मुक्तक,ग़ज़ल,हाइकु, लघु कहानी
लेखन का उद्देश्य-समाज में अपनी बात को रचनाओं के माध्यम से रखना