जीवन-यात्रा

mukesh bohara
जीवन के बेगाने गाने,
गुनगुनाता,आगे बढ़ता जाता हूं।
मुस्काता हूं,सावन को मुठ्ठी में भरकर,
चलता हूं,फिर गाता हूं॥
सकारात्मक चिंतन संभव,
पूरे होते मानव के अभीष्ट सभी।
सत्यम्,शिवम्,सुन्दरम् और,
प्रसन्न होते ईष्ट सभी॥
मैं उठता हूं अपने पैरों,
सुमनों को जल दे आता हूं।
मुस्काता हूं,सावन को मुठ्ठी में भरकर,
चलता हूं,फिर गाता हूं॥
कुछ लोग जहां में हर पल केवल,
पतझड़ के गाने गाते हैं।
इसी तरह की फितरत से ही,
वे जग जाने जाते हैं॥
मैं आवारा,बंजारा बन,
जीवन के गाने गाता हूं।
मुस्काता हूं,सावन को मुठ्ठी में भरकर,
चलता हूं,फिर गाता हूं॥
मायूसी,लाचारी,खुंदक,
महज मन में उठे भाव है।
मस्त फकीरी जीवन मस्ती,
मानव का तो यही स्वभाव है॥
घोर हताशा के दिवस भी,
मांदल जोर बजाता हूं।
मुस्काता हूं,सावन को मुठ्ठी में भरकर,
चलता हूं,फिर गाता हूं॥
क्या तेरा,क्या मेरा यहां पर,
सब मिट्टी के ढेले हैं।
भीड़,कारवों,अपनों में भी,
हम सब ‘अमन’ अकेले हैं॥
नश्वर जीवन की नैया ले,
यहां आता-जाता रहता हूं।
मुस्काता हूं,सावन को मुठ्ठी में भरकर,
चलता हूं,फिर गाता हूं॥
                                                                                     #मुकेश बोहरा ‘अमन’ 
परिचय : मुकेश बोहरा ‘अमन’ अधिकतर बाल रचनाएँ रचते हैं। आप पेशे से अध्यापक होकर बाड़मेर (राजस्थान) में बसे हुए हैं।

matruadmin

Next Post

हुनर किस काम का ?

Mon Dec 11 , 2017
वह हुनर  किस काम का, जो किसी के काम न आए ? वह मनुष्य मनुष्य क्या, जो मनुष्य के काम में न आए ? वह धर्म भी किस काम का, जो गैरों  से बैर करना सिखाए ? धरा पर शत धर्म,सबको, प्रेम पथ पर चलना सिखाए॥ चोरी-ठगी-बेईमानी, का हुनर बेकार […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।