जिंदगी को पाने में , सांसो का अरमान बिक चुका है “

khushabu kumari

जमीन बिक चुकी है , आसमान बिक चुका है ,
ख्वाहिशों के धंधे में , हर अरमान बिक चुका है ,
पल भर का समय नही ,
पल भर का समय नही , की खुद को समय से तौलु ,
सपनों के तलाश में , समय का आशियाँ बिक चुका है ,

पल भर की तलाश थी , की खुद को तराश लूं ,
पल भर की तलाश थी , की खुद को उभार लूँ ,
पर इस पल भर में , जिंदगी का मुकाम दिख चुका है ,
इस पल भर में , नुमाइंदों का फरमान बिक चुका है ,

क्या खुशकिशमती रही होगी , जो सपनो में खोई होगी ,
क्या खुशकिशमती रही होगी , जो सपनो में खोई होगी ,
हमारे तो सपनो में ही , सपनो का पैगाम बिक चुका है ,

जिंदगी का फलसफा यही है मेरे दोस्त ,
जिंदगी को पाने में ही , साँसों का अरमान बिक चुका है ।।

#खुशबू कुमारी

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

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