नहीं रोती है आँखें अब,
किसी के बुझे चुल्हे पे
भूख से तड़पते बच्चों पर,
नहीं आता है रहम किसी कोl
नशे में डगमगाते युवाओं के कदम,
नहीं जाता है ध्यान किसी का
बेटे की याद में बिताते पल पर,
टूटती सांसों की डोर परl
नहीं थामता हाथ वृद्धजनों का,
बेटियों की लुटती अस्मत पर
नहीं उबलता खून किसी का,
सरहद पर कटते सिरों काl
नहीं मांगता हिसाब कोई,
गद्दारों की जहरभरी बातों पर
नहीं रोष दिखाता है कोई,
सब मस्त हैं अपने-आप में
चापलूसी के मंत्रजाप मेंl
ये तो नहीं था मेरे,
सपनों का भारत
मेरे बापू का भारत,
मेरे राम काभारत
मेरे कृष्ण का भारतl
मैं मन ही मन सोच रहा हूं,
ऐ मेरे सपनों के भारत
तुझे मैं ढूंढ रहा हूंll
#सुरेन्द्र अग्निहोत्री ‘आगी’
परिचय: सुरेन्द्र अग्निहोत्री ‘आगी’ ने बी.काम.और डी.एड. के साथ ही एम.ए(हिन्दी तथा इतिहास) भी किया है। १९६२ में ६ जुलाई को जन्मे और पढ़ाई के बाद शिक्षक बने। आप छत्तीसगढ़ के जिला महासमुन्द में निवास करते हैं। छत्तीसगढ़ी और हिन्दी भाषा में आपकी २ किताब शीघ्र ही छपकर आने वाली हैं।