पाखंड की सजा

mukesh jain
पाखंड को मिली सजा देश तनाव में,
खुसर-फुसर हो रही थी मेरे  गांव में।
कौन सच्चा-कौन झूठा पहचान हो कैसे,
हम माथा रख देते चमत्कारी पाँव में।
पार करेगें हमें वो कहते तो यही थे,
बस इसलिए बैठे हम उनकी नाव में।
नाम भी था काम भी पैसा बहुत ही,
लुट ही गया सब अय्याशी के दाँव में।
दोषी निकले,निर्दोष खुद को कहने वाले,
पहुँचे अब कारावास की छाँव में॥
                                                            #मुकेश जैन ‘मनमौजी’
परिचय : मुकेश जैन ‘मनमौजी’ का जन्म २२ जुलाई १९६१ कॊ छपारा जिला सिवनी(मध्यप्रदेश)में हुआ है। वाणिज्य विषय में स्नातक तक शिक्षित श्री जैन 
सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय होकर कई सेवा संस्थान से जुड़े हुए हैं तो स्थापना भी की है। आपकी विधा हास्य और व्यंग्य है। लेखनी की बदौलत अनेक सम्मान प्राप्त किए हैं।
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मोबाइल 8871813171

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