यादों का इक दरिया,
तेरे दिल की हर गली से
हो के लौट आया है।
हर वो याद जिसमें,
मेरी तन्हाईयों के तोहफे थे
समेट लाया था।
तेरी दुनिया की सारी,
वीरानियों को आबाद कर
खुद को तन्हा कर आया।
यादों का इक दरिया,
बहाकर सारे सितम
खुशियों के चराग जला आया।
कुछ यादें बचपन की,
कुछ अल्हड़पन की
कुछ में शिकवे शिकायतें,
कुछ में अशआर भीगे भीगे थे।
सबको समेट झोली अपनी,
भर लाया
खुशियों से झोली भर लाया॥
#डॉ. नीलम
परिचय: राजस्थान राज्य के उदयपुर में डॉ. नीलम रहती हैं। ७ दिसम्बर १९५८ आपकी जन्म तारीख तथा जन्म स्थान उदयपुर (राजस्थान)ही है। हिन्दी में आपने पी-एच.डी. करके अजमेर शिक्षा विभाग को कार्यक्षेत्र बना रखा है। सामाजिक रुप से भा.वि.परिषद में सक्रिय और अध्यक्ष पद का दायित्व भार निभा रही हैं। आपकी विधा-अतुकांत कविता, अकविता, आशुकाव्य आदि है।
आपके अनुसार जब मन के भाव अक्षरों के मोती बन जाते हैं,तब शब्द-शब्द बना धड़कनों की डोर में पिरोना ही लिखने का उद्देश्य है।
Thu Sep 7 , 2017
चार -पाचँ दिन से भिड़कर पूरण ने एक जोड़ी `पनही` तैयार की थी। उसके बाप-दादा भी पटेलों के लिए पनही और पटलनों के लिए बाणा गढ़ते-गढ़ते ही मरे-खपे थे। यह पूरण का ख़ानदानी काम था। पनही में एक-एक टाँका बहुत मन से टाँकने के बाद पूरण उन्हें चमकाने में जुटा […]