हुआ पतन है संस्कारों का क्रोध बहुत अब आता है।
पाखण्डी को देख-देखकर धर्म खड़ा शर्माता है॥
बेच चुके निज आन-बान को,धर्म बेचने वाले हैं।
गन्दी मछली के कारण अब नीरकुंड भी नाले हैं॥
हम तो समझा करते थे कि धर्म बचाने आएंगे।
पता नहीं,आभास नहीं था इसे बेचकर खाएंगे॥
साधु उनको कहते हैं जो देश धर्म का मान करें।
साधु उनको कहते हैं जो संस्कृति का सम्मान करें॥
साधु उनको कहते हैं जो नारी लाज बचाते हैं।
साधु उनको कहते हैं जो रक्षक भी बन जाते हैं॥
साधु उनको कहते हैं जो लोभ मोह सब छोड़ चुके।
दुनियादारी छोड़-छाड़कर हर बंधन को तोड़ चुके॥
पर ये कैसा साधु जन्मा भारत-भू की माटी पर।
इसके कृत्य देख-देखकर शर्म लगी परिपाटी पर॥
शर्मिंदा है धर्म सनातन, शर्मिंदा हर हिन्दू है।
श्वेत पृष्ठ के ऊपर लगता जैसा काला बिन्दु है॥
पहले आशाराम गया था, रामवृक्ष कुछ जाते हैं।
रामपाल और राम-रहीम से खुद को राम बताते हैं॥
नहीं बराबर चरण धूली के,राम नाम बदनाम किया।
राम नाम की शरण पकड़कर ओछा गंदा काम किया॥
राम सदा ही धर्म सनातन मर्यादा के पोषक थे।
राम हमारे संस्कार और संस्कृति के उद्घोषक थे॥
दुष्ट अधर्मी हुए धरा पर उनके वो संहारक थे।
निर्धन की पूँजी होते थे, असहाय के तारक थे॥
ये साधु जो राम नाम का चोला पहने फिरते हैं।
राम तो छोड़ो,रावण भी इनके पापों से डरते हैं॥
दुष्कर्म करें जो,करते अगवा शोषण के अपराधी हैं।
हथियारों का रखें जखीरा,आतंकी उन्मादी हैं॥
हुआ फैसला तीन तलाक का,मुस्लिमों ने अपनाया था।
न्यायालय का निर्णय था, पूरे भारत को भाया था॥
इक दुष्कर्मी की खातिर क्यों इतना शोर मचाते हो।
न्यायालय ने न्याय किया है,क्यों इसको झुठलाते हो॥
वो ही लड़की अगर तुम्हारी बेटी बहन हुई होती।
तब भी क्या ये भीड़ सड़क पर वाहन फूँक रही होती॥
ये भीड़ नहीं हटती,लेकिन तब तुम तो साथ नहीं होते।
बर्बादी के आलम पर तुम सागर भर आँसू रोते॥
कवि ‘नमन’ आह्वान करे, यही सच्चाई अपनाओ अब।
नहीं अगर ये कर सकते तो बाबा ही बन जाओ अब॥
लेकिन इतना याद रहे, विश्वास नहीं टिक पाएगा।
बाबा ऐसे रहे अगर,हर आतंकी कहलाएगा॥
#नमन जैन ‘अद्वितीय’
परिचय: नमन जैन ‘अद्वितीय’ की आयु १८ वर्ष है,और लेखन अवधि १० माह है।बी.काॅम. में अध्ययनरत नमन उत्तर प्रदेश के शामली स्थित खेडी करमू में रहते हैं। आपकी रुचि काव्य लेखन में है।