न काम कोई …………… दवा आएगी,
न काम कोई …………… दुआ आएगी
मौत आकर खड़ी होगी जब सामने,
हंस उड़ जाएगा,काया रह जाएगी…।
न काम कोई ………॥
किसे है पता काल के चक्र का,
तोड़ जीवन मरण के वक्र का
अनहोनी होनी में बदलेगी जब,
न उस वक्त कोई सदा आएगी…।
न काम कोई ……………॥
कमा लो भले चाहे जितनी भी दौलत,
बढ़ा दो घरों के ……पहरों की औसत
रखेगा कदम काल…का चक्र जब भी,
न कोई भी मोहलत….दिला पाएगी…।
न काम कोई ………॥
है मिली जिन्दगी तो करो नेकियां,
न दौलत की झूठी भरो शेखियाँ
नश्वर जहाँ में……….न कोई बचा,
नेकियां तेरी दुनिया सदा गाएगी…।
न काम कोई……………दवा आएगी,
न काम कोई……………दुआ आएगी॥
#विजय सिंह राणा ‘ध्रुव’
परिचय: विजय सिंह राणा ‘ध्रुव’ का सम्बन्ध उत्तरप्रदेश के बाँदा जिले से है। वैसे आप राणा सिंह विजय और उपनाम ‘ध्रुव’ लिखना पसंद करते हैं। जन्मस्थान-ग्राम लोहरा (बाँदा) है। एमए(इंग्लिश) और बी.एड.शिक्षित श्री राणा पेशे से शिक्षक होकर प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष भी हैं। लेखन में गीत,ग़ज़ल और कहानी लिखते हैं। कुछ कहानी अभी अप्रकाशित है।