एक कौआ जो अति उदास था,
खुद को कोसा करता था।
मैं कुरूप आवाज कर्कशा,
सबसे वो लड़ता था।
एक दिन वह बोला कोयल से,
सभी चाहते तुमको।
रूप नहीं पर स्वर है अच्छा,
सभी भगाते मुझको।
बोली कोयल मुझसे खुश तो,
तोता ही को जानो।
रूप रंग स्वर से है शोभित,
उसका लोहा मानो।
पहुँचा जब तोते तक कौआ,
तोते ने समझाया।
कौन ख़ुशी से नाचे जग में,
नाम मोर बतलाया।
कौआ फिर बोला मोर से,
ताज तुम्हारे सर है।
इस जग में सबसे खुश तुम हो,
किया कृपा ईश्वर है।
बोला मोर है खुशनसीब वो,
जो आजाद है बौआ।
आज तलक कैदी की भाँति,
देखा न कोई कौआ।
औरों को खुश देख-देखकर,
उपछे नहीं समुन्दर।
अंतर मन में झांक के देखो,
ख़ुशी है तेरे अंदर।
#बिनोद कुमार ‘हंसौड़ा’
परिचय : बिनोद कुमार ‘हंसौड़ा’ का जन्म १९६९ का है। आप दरभंगा (बिहार)में प्रधान शिक्षक हैं। शैक्षिक योग्यता दोहरा एमए(इतिहास एवं शिक्षा)सहित बीटी,बीएड और प्रभाकर (संगीत)है। आपके नाम-बंटवारा (नाटक),तिरंगा झुकने नहीं देंगे, व्यवहार चालीसा और मेरी सांसें तेरा जीवन आदि पुस्तकें हैं। आपको राष्ट्रभाषा गौरव(मानद उपाधि, इलाहाबाद)सहित महाकवि विद्यापति साहित्य शिखर सम्मान (मानद उपाधि) और बेहतरीन शिक्षक हेतु स्वर्ण पदक सम्मान भी मिला है। साथ ही अनेक मंचो से भी सम्मानित हो चुके हैं
Tue Aug 22 , 2017
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