दरख्त

akansha divedi
दरख्त कभी बूढ़े नहीं होते,सदा देते छाँव हैं।
ढलती शाम के सायों में देते हमें विश्राम हैं॥
इनका हाथ थाम के रखो,ये सुबह की धूप है।
सिर पर सदा बने रहे इनके हाथों की दुआएं॥
नन्हें हाथों को मिलता इनसे बड़ा इनाम है।
बच्चे के चेहरों की रौनक इनकी मुस्कान है॥
लड़खड़ाते हैं कदम, फिर भी ये न आम है।
ये तो तेरे मंदिर के जलते चराग़ों के समान है॥
इनके पैरों की धूल में मिलते सारे तीरथ धाम है।
न जाओ तुम मंदिर ये खुद मन्दिर समान है॥
रोज सुबह जो घर से जाते बच्चे उंगली थाम के।
शाम सबेरे किस्से सुनाते ये बच्चों के दादा हैं॥
ज्यादा भी तुम धन कमा लो,आए न वो कोई काम है।
इनको थामो इनको मानो,तो घर में खुद भगवान हैं॥
                                                                                   #आकांक्षा द्विवेदी
परिचय : आकांक्षा द्विवेदी की जन्मतिथि १६ अक्टूबर १९८६ है। आपकी शिक्षा स्नातकोत्तर और पेशे से शिक्षिका हैं। लेखन क्षेत्र में शीघ्र ही २ पुस्तक आने वाली हैं। कवियित्री आकांक्षा द्विवेदी का निवास बिंदकी जिला फतेहपुर में है।सामाजिक अव्यवस्था पर कविता के माध्यम से प्रहार करके सुधार लाना आपका उद्देश्य है।

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साहित्य और  समाज के रिश्ते

Sat Aug 12 , 2017
शिक्षा की भाषा,दैनंदिन कार्यों में प्रयोग की भाषा,सरकारी काम-काज की भाषा के रूप में हिन्दी को उसका जायज गौरव दिलाने के लिए अनेक प्रबुद्ध,हिन्दीसेवी और हितैषी चिंतित हैं और कई तरह के प्रयास कर रहे हैं,जनमत तैयार कर रहे हैं। समकालीन साहित्य की युग-चेतना पर नजर दौड़ाएं तो यही दिखता […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।