वेदना

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dinesh saini
है वेदना गर मेरे मन में,
क्यूं धीर बूंदें खो रही हैं।

क्यूं जागती हैं मेरे संग में,
जबकि वो सुख से सो रही है॥

सावन की ये ठंडी हवा क्यूं,

मुझे ज्येष्ठ की लू लग रही है।
है मन मेरा विरह अग्नि में तो क्यूं,
न लपटें चैन उसका खो रही है॥

आज क्षितिज पर भी क्यूं मुझको,
ये धरती-अम्बर न मिलते दिखते हैं।

प्रिय के बिना तो किसी का साथ ही न चाहता हूँ,
फिर भी न जाने क्यूँ ये धरती साथ मेरे रो रही है।

सोचा था मैंने जाम लूँ मैं,
कुछ पल तो उसकी याद बिसरे।

न जाने जुदा होकर के भी क्यूं,
मदहोश आँखें उसकी खातिर हो रही हैं॥

क्यूँ नजर आती है मुझको,
सारी ही सृष्टि ये व्याकुल॥

मैं हूँ ‘अकेला’ तो क्यूँ आँखें,,
यूँ बादलों की चोर रही हैं।।

है वेदना गर मेरे मन में,
क्यूं धीर बूंदें खो रही हैं।

क्यूँ जागती हैं मेरे संग में,
जबकि वो सुख से सो रही है॥
                                                                           #दिनेश सैनी ‘अकेला’
परिचय : दिनेश सैनी ‘अकेला’ हरियाणा से हैं। हिसार केमिर्जापुर रोड पर श्याम विहार में बसे हुए हैं। आप वर्तमान में शिक्षा में स्नातक में अध्ययनरत हैं। लेखन में काफी समय से सक्रिय हैं। श्री सैनी बारहवीं की पढ़ाई के समय से ही लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। गीत,कविता और गज़ल में विशेष रुचि है।

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तुम हमसे जाने जाओ ...

Tue Aug 1 , 2017
  तेरे अहसास के आगोश में, सोना भी खूबसूरत सपने जैसा लगता है। रातें भी उनींदी-सी लगती है कि, कोसों दूर भाग गई नींद जैसे… मेरा सुकून मुझसे दगा कर गया , इसकी वाजिब वजह हो तुम… हँस पड़ता हूँ कभी-कभी तुझे याद करके यूँ ही… और कभी खो जाता हूँ, हँसते-हँसते तुझमें। आँखें भी मुझसे धोखा कर गई,तेरा ही अक्स दिखाती है हर किसी में… लगता है तेरा वजूद रमा हुआ है मेरे अस्तित्व में, कि पहचान हो जैसे… एक-दूसरे की हम-तुम। बनी रहे ये पहचान सदियों तलक कि तुम भी मेरे अहसास में खो जाओ, कुछ ऐसा करें आओ, कि हम तुमसे पहचाने जाएँ… `मनु` तुम हमसे जाने  जाओ, तुम हमसे जाने जाओ…ll                                                 […]

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।